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खनन चोरी रोकने की बजाय करा रहे थे चोरी
Updated Thu, 05 Oct 2017 02:31 AM IST
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हल्द्वानी। गौला में उप खनिज की चोरी का खुला खेल भी अब सामने आया है। चोरी रोकने के लिए लगाए गए इलेक्ट्रानिक तौल कांटों की मिलीभगत भी इसमें पाई गई है। करीब सात सौ वाहनों की जांच के बाद वन विभाग ने वन विकास निगम पर तीन लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है।
गौला में करीब 13-14 साल पहले डंपर, ट्रैक्टर ट्राली, ट्राला, टिपर वगैरह वाहनों से बिना तौल के ही खनन निकासी की जाती थी। नदी से निकलने वाले उप खनिज का तुलान नहीं होने से वन विभाग को हर साल करोड़ों का चूना लगता था। इसको रोकने के लिए वन निगम ने 2005-06 में गौला के सभी खनन गेटों पर इलेक्ट्रानिक तौल कांटे लगाने का ठेका दिया गया। मकसद था कि नदी से निकलने वाली उप खनिज का वजन तोला जाए ताकी एक क्विंटल का भी राजस्व मिले। इधर 2014 में इन कांटों का ठेका 2017 तक के लिए नंधौर हल्द्वानी उज्जवल धर्मकांटा सोसायटी को दिया था।
कुछ समय पहले ही वन महकमे को नदी में उप खनिज भरने जा रहे खाली वाहनों के वजन में तुलाई के दौरान हेर फेर कर सरकारी राजस्व को चूना लगाने की शिकायत मिली। शिकायत की जांच के दौरान वन अफसर हैरान रह गए। 71-72 कुंतल के खाली वाहन का वजन बढ़ा कर 90 से 102 कुंतल तक दर्शाया गया था। इसके बाद वन विभाग ने सभी गेटों पर वाहनों की जांच की तो 694 वाहनों के वजन में हेर फेर निकला। इस हेर फेर में 12,070 कुंतल उप खनिज की चोरी पकड़ी गई थी। यह चोरी तो वो थी जो जांच में सामने आ गई थी। जबकि हजारों वाहन ऐसे थे जो वन विभाग की जांच के दायरे में नहीं आ सके। इस पर वन महकमे ने वन विकास निगम पर तीन लाख दो हजार 970 रुपये का जुर्माना भी ठोका है। वहीं सैकड़ों वाहनों के वजन में हेराफेरी बिना इलेक्ट्रानिक तौल कांटों की मदद से संभव नहीं हो सकती है, इसलिए तौल कांटा समिति भी सवालों के घेरे में आ गई है। हैरत तो यह है कि 694 वाहनों में हेर फेर कराने वाली तौल कांटा समिति के खिलाफ वन विकास निगम ने कोई भी कार्रवाई नहीं की।
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ऐसा होता है तौल कांटों पर वजन में हेर फेर
गौला के उप खनिज निकासी गेटों पर 26 कांटे लगे हुए हैं। इन कांटों पर वाहन वजन कराने के लिए आते हैं। यहीं से खनन चोरी का खेल शुरू होता है। जब वाहन रेता बजरी भरने को नदी में जाने के लिए गेट पर पहुंचता है तो इससे पूर्व तुलाई के लिए कांटे के प्लेटफार्म पर आता है। इस पर पीछे खड़ी गाड़ी के अगले दो पहिए भी कांटे पर चढ़ा दिये जाते हैं। इस तरह एक पूरी गाड़ी और दूसरी गाड़ी का कुछ हिस्सा भी वजन के आगणन में आ जाता है। इस तरह 71 कुंतल की गाड़ी 102 कुंतल की हो जाती है। फिर वाहन अंदर से उप खनिज भर कर लाता है और फिर से वजन कराता है। अब जो वजन आता है उसमें से 71 के बजाय 102 कुंतल घटाया जाता है। इस तरह 31 कुंतल उप खनिज बिना रायल्टी के चोरी होकर क्रशर तक पहुंचता है। बिना तौल कांटों की मदद से यह संभव नहीं हो सकता है।
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गौला में करीब 13-14 साल पहले डंपर, ट्रैक्टर ट्राली, ट्राला, टिपर वगैरह वाहनों से बिना तौल के ही खनन निकासी की जाती थी। नदी से निकलने वाले उप खनिज का तुलान नहीं होने से वन विभाग को हर साल करोड़ों का चूना लगता था। इसको रोकने के लिए वन निगम ने 2005-06 में गौला के सभी खनन गेटों पर इलेक्ट्रानिक तौल कांटे लगाने का ठेका दिया गया। मकसद था कि नदी से निकलने वाली उप खनिज का वजन तोला जाए ताकी एक क्विंटल का भी राजस्व मिले। इधर 2014 में इन कांटों का ठेका 2017 तक के लिए नंधौर हल्द्वानी उज्जवल धर्मकांटा सोसायटी को दिया था।
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कुछ समय पहले ही वन महकमे को नदी में उप खनिज भरने जा रहे खाली वाहनों के वजन में तुलाई के दौरान हेर फेर कर सरकारी राजस्व को चूना लगाने की शिकायत मिली। शिकायत की जांच के दौरान वन अफसर हैरान रह गए। 71-72 कुंतल के खाली वाहन का वजन बढ़ा कर 90 से 102 कुंतल तक दर्शाया गया था। इसके बाद वन विभाग ने सभी गेटों पर वाहनों की जांच की तो 694 वाहनों के वजन में हेर फेर निकला। इस हेर फेर में 12,070 कुंतल उप खनिज की चोरी पकड़ी गई थी। यह चोरी तो वो थी जो जांच में सामने आ गई थी। जबकि हजारों वाहन ऐसे थे जो वन विभाग की जांच के दायरे में नहीं आ सके। इस पर वन महकमे ने वन विकास निगम पर तीन लाख दो हजार 970 रुपये का जुर्माना भी ठोका है। वहीं सैकड़ों वाहनों के वजन में हेराफेरी बिना इलेक्ट्रानिक तौल कांटों की मदद से संभव नहीं हो सकती है, इसलिए तौल कांटा समिति भी सवालों के घेरे में आ गई है। हैरत तो यह है कि 694 वाहनों में हेर फेर कराने वाली तौल कांटा समिति के खिलाफ वन विकास निगम ने कोई भी कार्रवाई नहीं की।
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ऐसा होता है तौल कांटों पर वजन में हेर फेर
गौला के उप खनिज निकासी गेटों पर 26 कांटे लगे हुए हैं। इन कांटों पर वाहन वजन कराने के लिए आते हैं। यहीं से खनन चोरी का खेल शुरू होता है। जब वाहन रेता बजरी भरने को नदी में जाने के लिए गेट पर पहुंचता है तो इससे पूर्व तुलाई के लिए कांटे के प्लेटफार्म पर आता है। इस पर पीछे खड़ी गाड़ी के अगले दो पहिए भी कांटे पर चढ़ा दिये जाते हैं। इस तरह एक पूरी गाड़ी और दूसरी गाड़ी का कुछ हिस्सा भी वजन के आगणन में आ जाता है। इस तरह 71 कुंतल की गाड़ी 102 कुंतल की हो जाती है। फिर वाहन अंदर से उप खनिज भर कर लाता है और फिर से वजन कराता है। अब जो वजन आता है उसमें से 71 के बजाय 102 कुंतल घटाया जाता है। इस तरह 31 कुंतल उप खनिज बिना रायल्टी के चोरी होकर क्रशर तक पहुंचता है। बिना तौल कांटों की मदद से यह संभव नहीं हो सकता है।