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Nainital News: 12 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 06:15 PM IST
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12 aur niji dayitvon ko karan batao notice
- 12 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस
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- अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डालने का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
हल्द्वानी। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने जनपद के विभिन्न निजी विद्यालयों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों एवं जांच आख्या के आधार पर कार्यवाही करते हुए 12 और निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
नोटिस प्राप्त करने वाले विद्यालयों में सेंट लॉरेंस स्कूल देवलचौड़ हल्द्वानी, दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल हल्द्वानी, केवीएम पब्लिक स्कूल हीरानगर हल्द्वानी, माउंट लीटेरा जी स्कूल रामपुर रोड हल्द्वानी, दिल्ली पब्लिक स्कूल रामपुर रोड हल्द्वानी, ओरम द ग्लोबल स्कूल हल्द्वानी, जस गोविन स्कूल रामपुर रोड हल्द्वानी, डीएवी स्कूल हल्द्वानी, नैनी वैली स्कूल हल्द्वानी, गुरुकुल इंटरनेशनल स्कूल हल्द्वानी, शिवालिक इंटरनेशनल स्कूल हल्द्वानी, टीआरवी स्कूल बरेली रोड हल्द्वानी शामिल हैं।
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इससे पूर्व हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली एवं भीमताल क्षेत्र के 89 विद्यालयों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब तक नोटिस प्राप्त करने वाले स्कूलों की संख्या 101 हो गई है।
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मुख्य शिक्षा अधिकारी ने संबंधित विद्यालयों को 15 दिवस के भीतर संशोधित पुस्तक सूची जारी कर एनसीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए। किसी भी प्रकार की विक्रेता विशेष की बाध्यता तत्काल समाप्त करने, वेबसाइट पर पुस्तक सूची एवं शुल्क संरचना का पूर्ण प्रकटीकरण सुनिश्चित करने, अभिभावकों द्वारा पूर्व में खरीदी गई अनावश्यक पुस्तकों के संबंध में धनवापसी/समायोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने, शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त वसूले गए विभिन्न अवांछित शुल्कों का समायोजन आगामी महीनों की फीस में करने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समयसीमा में आदेशों का अनुपालन न करने की स्थिति में संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध मान्यता निलंबन/निरस्तीकरण सहित विधिक एवं दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

- प्रमुख आरोप एवं अनियमितताएं
जांच के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आए कि कई निजी विद्यालयों द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी पुस्तकों के अतिरिक्त अत्यधिक महंगी निजी प्रकाशनों की पुस्तकें अनिवार्य की गई हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त कुछ विद्यालयों द्वारा विशिष्ट विक्रेताओं से पुस्तकें एवं अन्य शिक्षण सामग्री क्रय करने हेतु अप्रत्यक्ष दबाव बनाया जा रहा है तथा विद्यालयों की वेबसाइट पर अनिवार्य सूचनाओं का प्रकटीकरण भी नहीं किया गया है।


- विधिक आधार एवं निर्देश
यह कार्यवाही ‘बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’, ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019’ तथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। शासन का उद्देश्य शिक्षा को सुलभ, पारदर्शी एवं आर्थिक रूप से न्यायसंगत बनाना है।

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