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कहीं चुनाव में मुद्दा न बन जाए एचएमटी
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हल्द्वानी। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट के चुनाव में जनता के समक्ष कोई ठोस मुद्दा सामने नहीं आया है। भाजपा मुख्य रूप से देश की सुरक्षा, राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव के मैदान में उतर चुकी है जबकि कांग्रेस मुद्दा तो दूर प्रत्याशी का नाम तय नहीं कर सकी है।
एचएमटी फैक्ट्री पर शनिवार को ताला लगने से लोगों के समक्ष रोजीरोटी का संकट आ गया है। कयास लगाया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में एचएमटी फैक्ट्री एक प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आ सकती हैं। इसे लेकर सभी सियासी दलों में अंदरखाने बेचैनी भी देखी गई है। एचएमटी फैक्ट्री को लेकर बीच-बीच में नई संभावनाओं को लेकर बातचीत होती रही, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका। लोगों को उम्मीद थी कि फैक्ट्री के पुराने दिन फिर लौट सकते हैं, लेकिन शनिवार को यह उम्मीद भी टूट गई। कभी कुमाऊं की प्रमुख औद्योगिक इकाई में ताला लगने से यह इतिहास बन गई। लोगों का कहना है फैक्ट्री बंद होने से युवाओं में काफी निराशा है।
कहीं चुनावी मुद्दा न बन जाए एचएमटी
इतिहास के पन्ने में जुड़ गया प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक संस्थान
एचएमटी कर्मचारियों से परिचर्चा
प्रबंधन की ओर से गलत कार्रवाई की गई है। यह निर्णय वापस होना चाहिए और फैक्ट्री को पुन: खोला जाए। हमारे समाने रोजगार का संकट आ गया है। - जसवंत सिंह
कई सालों से फैक्ट्री में कार्यरत थे। फैक्ट्री की ओर से वेतन के बिना ही खाते से इनकम टैक्स भर दिया जाता है। बिना किसी पूर्व सूचना के फैक्ट्री बंद कर दी गई है। -मुख्तार सिंह
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नियमित रूप से बायोमीट्रिक के जरिये उपस्थिति दर्ज होती रही है, इसके बाद भी बिना किसी भुगतान के ही रातों-रात फैक्ट्री बंद कर दी गई। पहले से ही एरियर का भुगतान न होने के चलते आर्थिक स्थिति खराब है। -अशोक कुमार
तीन साल से वेतन नहीं मिला है। अर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते इलाज के अभाव में तीन साथियों की मृत्यु हो चुकी है। अब फैक्ट्री बंद होने से आर्थिक संकट आ गया है। -जेसी तिवारी
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एचएमटी फैक्ट्री पर शनिवार को ताला लगने से लोगों के समक्ष रोजीरोटी का संकट आ गया है। कयास लगाया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में एचएमटी फैक्ट्री एक प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आ सकती हैं। इसे लेकर सभी सियासी दलों में अंदरखाने बेचैनी भी देखी गई है। एचएमटी फैक्ट्री को लेकर बीच-बीच में नई संभावनाओं को लेकर बातचीत होती रही, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आ सका। लोगों को उम्मीद थी कि फैक्ट्री के पुराने दिन फिर लौट सकते हैं, लेकिन शनिवार को यह उम्मीद भी टूट गई। कभी कुमाऊं की प्रमुख औद्योगिक इकाई में ताला लगने से यह इतिहास बन गई। लोगों का कहना है फैक्ट्री बंद होने से युवाओं में काफी निराशा है।
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कहीं चुनावी मुद्दा न बन जाए एचएमटी
इतिहास के पन्ने में जुड़ गया प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक संस्थान
एचएमटी कर्मचारियों से परिचर्चा
प्रबंधन की ओर से गलत कार्रवाई की गई है। यह निर्णय वापस होना चाहिए और फैक्ट्री को पुन: खोला जाए। हमारे समाने रोजगार का संकट आ गया है। - जसवंत सिंह
कई सालों से फैक्ट्री में कार्यरत थे। फैक्ट्री की ओर से वेतन के बिना ही खाते से इनकम टैक्स भर दिया जाता है। बिना किसी पूर्व सूचना के फैक्ट्री बंद कर दी गई है। -मुख्तार सिंह
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नियमित रूप से बायोमीट्रिक के जरिये उपस्थिति दर्ज होती रही है, इसके बाद भी बिना किसी भुगतान के ही रातों-रात फैक्ट्री बंद कर दी गई। पहले से ही एरियर का भुगतान न होने के चलते आर्थिक स्थिति खराब है। -अशोक कुमार
तीन साल से वेतन नहीं मिला है। अर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते इलाज के अभाव में तीन साथियों की मृत्यु हो चुकी है। अब फैक्ट्री बंद होने से आर्थिक संकट आ गया है। -जेसी तिवारी