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शिक्षा की गुणवता बढ़ाने के लिए नवाचार जरूरी : प्रो नौड़ियाल
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:55 AM IST
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शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नवाचार जरूरी : प्रो नौड़ियाल
नैनीताल।
विद्यार्थियों तक विचारों को पहुंचाने के लिए शिक्षक को उसकी समसामयिक परिस्थितियों के मुताबिक अपनी शिक्षण कला को विकसित करना चाहिए। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शिक्षक नवाचार का प्रयोग करें, परीक्षण और अवलोकन की प्रक्रिया अपनाते हुए निष्कर्ष तक पहुंचें। यह बात कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल ने कही। नौड़ियाल सोमवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज भवन में इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टेडीज एंड डबलपमेंट रिसर्च (आईपीएसडीआर) और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित कैपिसिटी बिल्डिंग ऑफ टीचर्स विषयक कार्यशाला में बोल रहे थे।
कार्यशाला में विज्ञान लेखक और साहित्यकार डॉ. देवेंद्र मेवाड़ी ने कहा कि विद्यार्थियों में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए शिक्षण और लेखन कला को विद्यार्थियों की अभिरुचियों को ध्यान में रखते हुए रोचक और सरल बनाना होगा। उन्होंने कहा कि विकसित देशों ने विज्ञान और अन्य विषयों को पढ़ाने के लिए अपनी भाषा को ही माध्यम बनाया, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। इससे विद्यार्थियों की रचनात्मक शक्ति और मौलिकता नष्ट हो रही है। इस मौके पर शैक्षिक दखल पत्रिका और उत्तराखंड उम्मीद जगाते शिक्षक पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यशाला के मुख्य आयोजक और आईपीएसडीआर के निदेशक प्रो. अतुल जोशी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन भाष्कर उप्रेती ने किया। कार्यशाला में डॉ. मनोज कुमार, डॉ. महिमा जोशी, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. प्रदीप जोशी, डॉ. कमल पांडे, डॉ. सरिका जोशी, रेखा चमोली, स्वाति मेलकानी, खजान सिंह, कमलेश जोशी, महेश पाठक, वैशाली बिष्ट आदि थे।
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नैनीताल।
विद्यार्थियों तक विचारों को पहुंचाने के लिए शिक्षक को उसकी समसामयिक परिस्थितियों के मुताबिक अपनी शिक्षण कला को विकसित करना चाहिए। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शिक्षक नवाचार का प्रयोग करें, परीक्षण और अवलोकन की प्रक्रिया अपनाते हुए निष्कर्ष तक पहुंचें। यह बात कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार नौड़ियाल ने कही। नौड़ियाल सोमवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के हरमिटेज भवन में इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टेडीज एंड डबलपमेंट रिसर्च (आईपीएसडीआर) और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित कैपिसिटी बिल्डिंग ऑफ टीचर्स विषयक कार्यशाला में बोल रहे थे।
कार्यशाला में विज्ञान लेखक और साहित्यकार डॉ. देवेंद्र मेवाड़ी ने कहा कि विद्यार्थियों में रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए शिक्षण और लेखन कला को विद्यार्थियों की अभिरुचियों को ध्यान में रखते हुए रोचक और सरल बनाना होगा। उन्होंने कहा कि विकसित देशों ने विज्ञान और अन्य विषयों को पढ़ाने के लिए अपनी भाषा को ही माध्यम बनाया, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। इससे विद्यार्थियों की रचनात्मक शक्ति और मौलिकता नष्ट हो रही है। इस मौके पर शैक्षिक दखल पत्रिका और उत्तराखंड उम्मीद जगाते शिक्षक पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यशाला के मुख्य आयोजक और आईपीएसडीआर के निदेशक प्रो. अतुल जोशी ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन भाष्कर उप्रेती ने किया। कार्यशाला में डॉ. मनोज कुमार, डॉ. महिमा जोशी, डॉ. भूपेंद्र सिंह, डॉ. प्रदीप जोशी, डॉ. कमल पांडे, डॉ. सरिका जोशी, रेखा चमोली, स्वाति मेलकानी, खजान सिंह, कमलेश जोशी, महेश पाठक, वैशाली बिष्ट आदि थे।
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