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सहकारिता में सरकार को झटका, हाई कोर्ट से संबंधित
Updated Sat, 14 Jul 2018 01:44 AM IST
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हल्द्वानी। सहकारिता चुनाव में पूरी ताकत झाेंकने वाली प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट के आदेश से झटका लगा है। सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत बृहस्पतिवार को काशीपुर में हुई भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में साफ ऐलान किया था कि जिसकी सरकार, उसी की सहकारिता। मंत्री का कहना था कि सहकारिता में कांग्रेस कहीं है ही नहीं और लड़ाई भाजपा की भाजपा से है।
शुक्रवार को हाईकोर्ट ने सहकारिता चुनाव पर 30 जुलाई तक रोक लगाकर सरकार की सहकारिता की तैयारी को भी प्रभावित किया है। सूत्रों के मुताबिक सहकारी प्रारंभिक कृषि ऋण समितियों के वार्डों का परिसीमन भाजपा के हिसाब से किया गया। हाईकोर्ट में परिसीमन ही मुद्दा बना है। निकाय की तरह ही अगर हाईकोर्ट दोबारा परिसीमन का आदेश जारी करता है तो सहकारिता चुनाव तो पीछे खिसकेंगे ही, सरकार को वार्डों पर दोबारा मेहनत भी करनी होगी। सहकारिता में अभी तक कांग्रेस का दबदबा रहा है। प्रदेश में सत्ता संभालते ही भाजपा ने कांग्रेस के इस वर्चस्व को खत्म करने की कोशिश शुरू कर दी थी। अब चुनाव के जरिये भाजपा इस काम को अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी में है। ऐसे में हाईकोर्ट का आदेश सरकार की इस तैयारी को प्रभावित करने वाला साबित हुई है। निकायों में भी सरकार इसी तरह से फंसी हुई नजर आ रही है। सहकारिता के चुनाव पीछे खिसके तो सरकार को एक साथ निकाय और सहकारिता के चुनावों के मोरचे पर जूझना पड़ सकता है।
निकाय के बाद अब सहकारिता में भी पीछे खिसक सकते हैं चुनाव
चुनाव में पूरी ताकत झोंके हुए है सहकारिता मंत्रालय
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शुक्रवार को हाईकोर्ट ने सहकारिता चुनाव पर 30 जुलाई तक रोक लगाकर सरकार की सहकारिता की तैयारी को भी प्रभावित किया है। सूत्रों के मुताबिक सहकारी प्रारंभिक कृषि ऋण समितियों के वार्डों का परिसीमन भाजपा के हिसाब से किया गया। हाईकोर्ट में परिसीमन ही मुद्दा बना है। निकाय की तरह ही अगर हाईकोर्ट दोबारा परिसीमन का आदेश जारी करता है तो सहकारिता चुनाव तो पीछे खिसकेंगे ही, सरकार को वार्डों पर दोबारा मेहनत भी करनी होगी। सहकारिता में अभी तक कांग्रेस का दबदबा रहा है। प्रदेश में सत्ता संभालते ही भाजपा ने कांग्रेस के इस वर्चस्व को खत्म करने की कोशिश शुरू कर दी थी। अब चुनाव के जरिये भाजपा इस काम को अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी में है। ऐसे में हाईकोर्ट का आदेश सरकार की इस तैयारी को प्रभावित करने वाला साबित हुई है। निकायों में भी सरकार इसी तरह से फंसी हुई नजर आ रही है। सहकारिता के चुनाव पीछे खिसके तो सरकार को एक साथ निकाय और सहकारिता के चुनावों के मोरचे पर जूझना पड़ सकता है।
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निकाय के बाद अब सहकारिता में भी पीछे खिसक सकते हैं चुनाव
चुनाव में पूरी ताकत झोंके हुए है सहकारिता मंत्रालय