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दहेज हत्याकांड में उम्रकैद की सजा बरकरार
Updated Sat, 23 Dec 2017 01:38 AM IST
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नैनीताल। हाइकोर्ट ने पौड़ी गढ़वाल में दहेज हत्या के एक मामले में विवाहिता के पति और उसकी मां को निचली अदालत से मिली आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मृतका की मां बसंती ने 23 जुलाई 2001 को थाने में एफआईआर दर्ज कर आरोप लगाया था कि बेटी के ससुराल पक्ष वाले दहेज की मांग करते थे। इसी के चलते उनकी बेटी को जलाकर मार दिया गया था। 20 दिसंबर 2011 को पौड़ी गढ़वाल के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दहेज हत्या के मामले में देवेंद्र सिंह और उसकी मां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपियों ने इस फैसले को अपील के जरिये हाइकोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मृतका की मां बसंती ने 23 जुलाई 2001 को थाने में एफआईआर दर्ज कर आरोप लगाया था कि बेटी के ससुराल पक्ष वाले दहेज की मांग करते थे। इसी के चलते उनकी बेटी को जलाकर मार दिया गया था। 20 दिसंबर 2011 को पौड़ी गढ़वाल के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दहेज हत्या के मामले में देवेंद्र सिंह और उसकी मां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपियों ने इस फैसले को अपील के जरिये हाइकोर्ट में चुनौती दी थी। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाइकोर्ट की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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