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अब तीन प्रतियों में लिखनी होंगी दवाएं
Updated Tue, 27 Jun 2017 01:55 AM IST
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अब तीन प्रतियों में लिखनी होंगी दवाएं
हल्द्वानी।
प्रधानमंत्री जनऔषधीय केंद्र के साथ ही सरकारी डॉक्टरों को अब जेनेरिक दवाएं ही लिखनी होंगी। जेनेरिक दवाएं डॉक्टरों को तीन प्रतियों में लिखनी होगी। डॉक्टरों को मरीजों को दवाएं कैपिटल लेटर में लिखनी होगी।
कई बार लिखावट साफ और स्पष्ट न होने के कारण मेडिकल स्टोर स्वामी या फार्मेसिस्ट नहीं पढ़ पाते हैं और गलत दवाएं चली जाती हैं। इसको रोकने के लिए सरकार ने मरीजों को तीन प्रतियों में दवाएं लिखने का आदेश निकाला है। एक पर्चा मरीज को दिया जाएगा, एक अस्पताल के रिकार्ड में रहेगा और एक मरीज की फाइल के साथ लगेगा। डॉक्टरों के लिए ये भी अनिवार्य किया गया है कि मरीज को दवाएं कंप्यूटर के माध्यम से लिखी जाएं। कंप्यूटर से न लिख पाने की स्थिति में डॉक्टर को कैपिटल लेटर में दवा लिखकर देनी होगी। सूत्रों की मानें तो ये व्यवस्था लागू होने के बाद कंप्यूटर पर ही दवाओं के नाम पहले से फीड होंगे और डॉक्टर के नंबर दबाने के साथ ही पर्चे पर दवा का विवरण आ जाएगा। इस प्रक्रिया से डॉक्टरों के ऊपर काम का दबाव बढ़ेगा और अंदर खाने इसका विरोध भी शुरू हो गया है। इस व्यवस्था की शुरुआत सरकारी अस्पतालों से जल्द ही की जाएगी। मरीजों के ऑनलाइन पंजीकरण की प्रकिया भी जल्द शुरू होने वाली है।
मरीजों तक सही दवा पहुंचे इसके लिए सरकार की ओर से कंप्यूटर से दवा लिखने का आदेश दिया गया है। कंप्यूटर से दवा न लिख पाने की स्थिति में कैपिटल लेटर में डॉक्टर को दवा लिखनी होगी। इस व्यवस्था को लागू कराने की दिशा में काम शुरू हो चुका है।
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डॉ. एलएम उप्रेती, चिकित्सा-स्वास्थ्य निदेशक
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हल्द्वानी।
प्रधानमंत्री जनऔषधीय केंद्र के साथ ही सरकारी डॉक्टरों को अब जेनेरिक दवाएं ही लिखनी होंगी। जेनेरिक दवाएं डॉक्टरों को तीन प्रतियों में लिखनी होगी। डॉक्टरों को मरीजों को दवाएं कैपिटल लेटर में लिखनी होगी।
कई बार लिखावट साफ और स्पष्ट न होने के कारण मेडिकल स्टोर स्वामी या फार्मेसिस्ट नहीं पढ़ पाते हैं और गलत दवाएं चली जाती हैं। इसको रोकने के लिए सरकार ने मरीजों को तीन प्रतियों में दवाएं लिखने का आदेश निकाला है। एक पर्चा मरीज को दिया जाएगा, एक अस्पताल के रिकार्ड में रहेगा और एक मरीज की फाइल के साथ लगेगा। डॉक्टरों के लिए ये भी अनिवार्य किया गया है कि मरीज को दवाएं कंप्यूटर के माध्यम से लिखी जाएं। कंप्यूटर से न लिख पाने की स्थिति में डॉक्टर को कैपिटल लेटर में दवा लिखकर देनी होगी। सूत्रों की मानें तो ये व्यवस्था लागू होने के बाद कंप्यूटर पर ही दवाओं के नाम पहले से फीड होंगे और डॉक्टर के नंबर दबाने के साथ ही पर्चे पर दवा का विवरण आ जाएगा। इस प्रक्रिया से डॉक्टरों के ऊपर काम का दबाव बढ़ेगा और अंदर खाने इसका विरोध भी शुरू हो गया है। इस व्यवस्था की शुरुआत सरकारी अस्पतालों से जल्द ही की जाएगी। मरीजों के ऑनलाइन पंजीकरण की प्रकिया भी जल्द शुरू होने वाली है।
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मरीजों तक सही दवा पहुंचे इसके लिए सरकार की ओर से कंप्यूटर से दवा लिखने का आदेश दिया गया है। कंप्यूटर से दवा न लिख पाने की स्थिति में कैपिटल लेटर में डॉक्टर को दवा लिखनी होगी। इस व्यवस्था को लागू कराने की दिशा में काम शुरू हो चुका है।
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डॉ. एलएम उप्रेती, चिकित्सा-स्वास्थ्य निदेशक