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कहीं सौ, कहीं दो सौ कांवड़िए ही दर्ज
हरिद्वार/रुड़की/ऋषिकेश ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2013 08:12 AM IST
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आपदा से शोकग्रस्त उत्तराखंड में कांवड़ियों की चहल-पहल ने कुछ सन्नाटा तो तोड़ा लेकिन आपदा के पहले सबक के तौर पर लिया गया यात्रियों के रजिस्ट्रेशन का संकल्प पूरा होता नहीं दिखा।
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सबसे ज्यादा कांवड़ियों का पंजीकरण ऋषिकेश में
रुड़की में मात्र सौ तो हरिद्वार में लगभग दो सौ कांवड़ियों का ही पंजीकरण हो पाया। अलबत्ता, ऋषिकेश में यह संख्या ठीक-ठाक रही। कंट्रोल रूम के आंकड़ों के मुताबिक नीलकंठ स्थित प्रसिद्ध शिवधाम में सावन के पहले दिन शाम सात बजे तक 11,470 श्रद्धालुओं ने शिव का जलाभिषेक किया था।
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यह गिनती पिछले साल के मुकाबले सिर्फ 10 फीसदी ही है। सबसे ज्यादा कांवड़ियों का पंजीकरण ऋषिकेश में ही हुआ। यहां 9130 पैदल कांवड़ियों के अलावा 269 वाहन और उनमें सवार 1200 श्रद्धालुओं का पंजीकरण किया गया।
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कांवड़ियों का आगमन शुरू
श्रावण मास के पहले दिन धर्मनगरी में कांवड़ियों का आगमन शुरू हो गया है। अनेक कांवड़िए गंगा जल भरकर लौट रहे हैं। राजस्थान और दूरस्थ हरियाणा के कांवड़ियों को चूंकि लंबी यात्रा करनी हैं, अत: जल भरकर उन्होंने वापसी की राह पकड़ ली है। मंगलवार के दिन सवेरे से ही सैकड़ों की संख्या में कांवड़िए हरकी पैड़ी पहुंचते रहे और जल भरकर लौटते रहे। आगमन और वापसी की गति पहले दिन धीमी रही, पर पूरे दिन बरकरार रही।