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‘लाखों’ की पंचायत, फिर भी समस्याओं का रोना
अमर उजाला, गौचर
Updated Mon, 16 Sep 2013 04:42 PM IST
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नगर पंचायत के खाते में विकास योजनाओं के लिए लाखों रुपए जमा हैं, लेकिन पंचायत कर्मियों को वेतन-भत्ते देने के अलावा फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं कर रही है।
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ऐसे में आपदा में क्षतिग्रस्त योजनाओं और निजी नुकसान की मरम्मत कब होगी, कहना मुश्किल है। नगर पंचायत को विकास कार्यों, कर्मचारियों के वेतन भत्ते के तौर पर राज्य वित्त से पहली किश्त के रूप में 56 लाख रुपए, डंपिंग यार्ड निर्माण के लिए 23 लाख रुपए प्राप्त हो चुके हैं। लेकिन यह धनराशि खर्च होने के बजाय पंचायत के खाते में पड़ी है।
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हां, इतना जरूर है कि 56 लाख रुपए में प्रतिमाह पंचायत में कार्यरत कर्मियों के वेतन व भत्ते पर तीन लाख खर्च हो रहे हैं। लेकिन नए बोर्ड गठन के चार माह बीत जाने के बाद भी अभी तक नगर क्षेत्र में खाते में जमा लाखों रुपयों से एक ढेले का काम भी शुरू नहीं हो पाया है।
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नगर पंचायत अध्यक्ष विकास कार्यों के शुरू नहीं होने के पीछे पंचायत पर बैठाई जा रही अनावश्यक जांचों को प्रमुख कारण बता रहे हैं। जबकि नगर की जनता समस्याओं से जूझ रही है।
मरम्मत का कार्य नहीं हुआ शुरू
16, 17 जून को आई आपदा, उसके बाद बरसात से नगर के सातों वार्डों में जलभराव, भूस्खलन, भूधंसाव और बरसाती नालों से आवासीय परिसरों, गौशालाओं, सरकारी कालोनियों, संपर्क मार्गों, निकास नालियों, सिंचाई नहरों, खेत खलियानों को नुकसान पहुंचा था।
लेकिन यहां भी मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ है। ये कार्य कब शुरू होंगे, इस सवाल का जवाब भी अध्यक्ष सहित किसी भी सभासद व अन्य पदाधिकारियों के पास नहीं है।
चार माह में ही नगर पंचायत पर 11 आरटीआई डाली जा चुकी है। कुछ लोग व्यक्तिगत राग-द्वेष से अनावश्यक शिकायतों से नगर पंचायतें पर जांचें बैठाने में जुटे हैं, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
- मुकेश नेगी, अध्यक्ष नगर पंचायत गौचर
ठेकेदारों का लगभग 25 लाख का पिछला भुगतान रुका है। नए बोर्ड गठन के बाद अभी कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं, जिससे ठेकेदार परेशान हैं।
- संदीप नेगी अध्यक्ष ठेकेदार संघ गौचर
आरटीआई की सूचनाएं देना ईओ एवं संबंधित स्टाफ का काम है। अध्यक्ष को पारदर्शिता से प्राप्त धनराशि को नगर के विकास कार्यों में खर्च कर इन्हें आगे बढ़ाना चाहिए।
- एमएस लिंगवाल, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष/सरंक्षक नगर विकास एवं भ्रष्टाचार विरोधी मंच गौचर
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