{"_id":"4022b0fa-e857-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"lapa-glacier-breaking-creat-flood","type":"story","status":"publish","title_hn":"पिथौरागढ़ः लापा ग्लेशियर टूटने से आई थी बाढ़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पिथौरागढ़ः लापा ग्लेशियर टूटने से आई थी बाढ़
बिजेंद्र लुंठी/कृष्णा गर्व्याल
Updated Tue, 09 Jul 2013 11:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
17 जून की पिथौरागढ़ जिले में आई आपदा का प्रमुख कारण लापा ग्लेशियर टूटना रहा। धारचूला से 60 किमी दूर तीदांग से लेकर धारचूला, बलुवाकोट, जौलजीबी, झूलाघाट तक तबाही मचाने में तीदांग के लापा ग्लेशियर के साथ ही छिपलाकेदार में बादल फटना और धौलीगंगा बिजली परियोजना के डैम से ओवर फ्लो हुए पानी का अहम रोल रहा।
विज्ञापन
पढ़े, उत्तराखंड की खबरों की विशेष कवरेज
विज्ञापन
ग्लेशियर से मची तबाही के मंजर का अंदाजा तीदांग के स्यंगरमजारा के जंगल से लगाया जा सकता है, जहां कई किमी जंगल पूरी तरह साफ हो गया है।
धारचूला में 17 जून को आई भीषण आपदा का कारण मूसलाधार बारिश के साथ ग्लेशियर का दरकना भी रहा। इसके निशान तीदांग गांव के स्यंगररमजारा के जंगल में देखे जा सकते हैं। यहां कई किलोमीटर तक जंगल का नामोनिशान नहीं है। ग्लेशियर एक पूरे पहाड़ को ही अपने साथ बहा ले गया।
विज्ञापन
ग्लेशियर के खिसकने से बाढ़ की स्थिति पैदा हुई
लापा ग्लेशियर के खिसकने से तीदांग के चलंती नाले में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई। यही नाला धौलीगंगा में मिलने के बाद तवाघाट में काली नदी में मिल जाता है। बाढ़ की भीषण बनाने में धौलीगंगा बिजली परियोजना के डैम में मलबा भरने से एक साथ डैम का पानी ओवर फ्लो होना और छिपलाकेदार में बादल फटने का भी प्रमुख हाथ रहा है।
इन तीन कारणों से आई बाढ़ ने तवाघाट, तपोवन, गोठी, बलुवाकोट, कालिका, छारछुम, जौलजीबी, झूलाघाट तक के इलाके में तबाही ला दी। तीदांग की ग्राम प्रधान रेखा तितियाल, स्थानीय निवासी रमेश तितियाल, कृष्ण फिरमाल ने बताया कि लापा ग्लेशियर टूटने का मंजर काफी भयावह था। हर तरफ धूल के गुबार उठ रहे थे।
साफ देखे जा सकते हैं ग्लेशियर टूटने के निशान
अपनी आंखों से तीदांग में तबाही का मंजर देखकर आए रं कल्याण संस्था पिथौरागढ़ के अध्यक्ष और नैनीताल बैंक में कार्यरत लाल सिंह बोनाल ने बताया कि तीदांग में ग्लेशियर टूटने के निशान साफ देखे जा सकते हैं। प्रशासन की ओर से भौगोलिक जानकार के रूप में एक जुलाई को हेलीकाप्टर से तीदांग गए बोनाल ने नदी, घाटी वाले इलाकों की हालत काफी दयनीय बताई।
खबर पर राय देने के लिए यहां क्लिक करें