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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल में जंक खा रही है एक्सरे मशीन
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल में बंद पड़ा एक्सरे कक्ष।
- फोटो : KOTDWAR
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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाह कार्यप्रणाली के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल में लगी एक्सरे मशीन का लाभ क्षेेत्रीय जनता को नहीं मिल पा रहा है। विगत 17 सालों से अस्पताल के एक्सरे कक्ष पर ताला लटका है, उसके अंदर रखी एक्सरे मशीन जंक खा रही है। स्थानीय लोग एक्सरे कराने के लिए रामनगर व कोटद्वार के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
वर्ष 2002 में ब्लॉक की जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल की स्थापना की थी। तब यहां अन्य उपकरणों के साथ एक्सरे मशीन को भी स्थापित किया गया था। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग एक्सरे मशीन के लिए कर्मचारी की तैनाती करना भूल गया।
सामाजिक कार्यकर्ता राजेश रावत, राजेंद्र सिंह नेेगी, महिपाल सिंह का कहना है कि बीरोंखाल की आबादी लगभग 24 हजार के आसपास है। क्षेत्र में बीमारी और दुर्घटना होने पर लोगों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल लाया जाता है। लेकिन, बिना एक्सरे के डॉक्टर चोट व टीबी जैसी घातक बिमारी का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। जिसके कारण डॉक्टर इस प्रकार के मरीजों को रामनगर अथवा कोटद्वार बेस अस्पताल के लिए रेफर कर देते हैं। जिसका खामियाजा गरीब मरीजों को झेलना पड़ता है।
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उधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल के प्रभारी डा. शैलेंद्र रावत ने बताया कि बिना एक्सरे के घायलों की सही इलाज करने मे परेशानी होती है। लगातार शासन से एक्सरे टेक्नीशियन की मांग कर रहे हैं। टेक्नीशियन की तैनाती होते ही क्षेत्रीय जनता को एक्सरे की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
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वर्ष 2002 में ब्लॉक की जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल की स्थापना की थी। तब यहां अन्य उपकरणों के साथ एक्सरे मशीन को भी स्थापित किया गया था। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग एक्सरे मशीन के लिए कर्मचारी की तैनाती करना भूल गया।
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सामाजिक कार्यकर्ता राजेश रावत, राजेंद्र सिंह नेेगी, महिपाल सिंह का कहना है कि बीरोंखाल की आबादी लगभग 24 हजार के आसपास है। क्षेत्र में बीमारी और दुर्घटना होने पर लोगों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल लाया जाता है। लेकिन, बिना एक्सरे के डॉक्टर चोट व टीबी जैसी घातक बिमारी का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। जिसके कारण डॉक्टर इस प्रकार के मरीजों को रामनगर अथवा कोटद्वार बेस अस्पताल के लिए रेफर कर देते हैं। जिसका खामियाजा गरीब मरीजों को झेलना पड़ता है।
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उधर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीरोंखाल के प्रभारी डा. शैलेंद्र रावत ने बताया कि बिना एक्सरे के घायलों की सही इलाज करने मे परेशानी होती है। लगातार शासन से एक्सरे टेक्नीशियन की मांग कर रहे हैं। टेक्नीशियन की तैनाती होते ही क्षेत्रीय जनता को एक्सरे की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।