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महिलाओं ने मशरूम उत्पादन को बनाया रोजगार का जरिया
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सुखरौ देवी स्वयं सहायता समूह और सिद्धबाबा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं मशरूम का उत्पादन कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। इन दोनों समूह की महिलाओं की ओर से एक माह पूर्व स्वयं के सहयोग से धनराशि एकत्रित कर मशरूम की खेती शुरू की गई। उन्होंने पहली फसल के रूप में 50 किलो मशरूम का उत्पादन किया है। महिलाओं की ओर से मशरूम की जैविक खेती की जा रही है। पहली फसल से उत्साहित महिलाएं अब इसके वृहद उत्पादन की तैयारी में जुटी हुई हैं।
सुखरौ देवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष शर्मिला नेगी ने बताया कि उनके समूह ने सिद्धबाबा स्वयं सहायता समूह के साथ मिलकर मशरूम उत्पादन की ठानी। दोनों स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 20 महिलाओं ने स्वयं के सहयोग से करीब 5 हजार रुपये की धनराशि एकत्र कर मशरूम उत्पादन कर कार्य शुरू किया। इसके तहत उन्होंने 10 गुना 12 के एक कमरे में करीब 70 बैग लगाए। उन्होंने बताया कि करीब एक माह बाद उन्होंने जनवरी माह में पहली फसल के रूप में करीब 50 किलो मशरूम का उत्पादन किया है। उनकी ओर से ढिंगरी मशरूम की जैविक खेती की जा रही है।
40 हजार रुपये तक काम चुकी हैं महिलाएं
सुखरौ देवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष शर्मिला नेगी, कोषाध्यक्ष सुमति रावत, सचिव शोभा रावत, सिद्धबाबा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रीना डोबरियाल और सचिव हेमलता बड़थ्वाल ने बताया कि उनके समूह की महिलाओं ने एक माह पूर्व मशरूम उत्पादन शुरू किया है। एक माह के अंतराल में करीब 4 बार मशरूम निकाल लिया है। जिससे करीब 40 हजार रुपये की आय का अनुमान है। शर्मिला नेगी ने बताया कि उन्होंने जलागम से मशरूम उत्पादन के साथ ही खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण लिया था। वर्ष 2004 से 2007 तक उन्होंने देहरादून जिले के जौनसार भाबर में महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण और मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया।
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सुखरौ देवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष शर्मिला नेगी ने बताया कि उनके समूह ने सिद्धबाबा स्वयं सहायता समूह के साथ मिलकर मशरूम उत्पादन की ठानी। दोनों स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 20 महिलाओं ने स्वयं के सहयोग से करीब 5 हजार रुपये की धनराशि एकत्र कर मशरूम उत्पादन कर कार्य शुरू किया। इसके तहत उन्होंने 10 गुना 12 के एक कमरे में करीब 70 बैग लगाए। उन्होंने बताया कि करीब एक माह बाद उन्होंने जनवरी माह में पहली फसल के रूप में करीब 50 किलो मशरूम का उत्पादन किया है। उनकी ओर से ढिंगरी मशरूम की जैविक खेती की जा रही है।
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40 हजार रुपये तक काम चुकी हैं महिलाएं
सुखरौ देवी स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष शर्मिला नेगी, कोषाध्यक्ष सुमति रावत, सचिव शोभा रावत, सिद्धबाबा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष रीना डोबरियाल और सचिव हेमलता बड़थ्वाल ने बताया कि उनके समूह की महिलाओं ने एक माह पूर्व मशरूम उत्पादन शुरू किया है। एक माह के अंतराल में करीब 4 बार मशरूम निकाल लिया है। जिससे करीब 40 हजार रुपये की आय का अनुमान है। शर्मिला नेगी ने बताया कि उन्होंने जलागम से मशरूम उत्पादन के साथ ही खाद्य प्रसंस्करण का प्रशिक्षण लिया था। वर्ष 2004 से 2007 तक उन्होंने देहरादून जिले के जौनसार भाबर में महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण और मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया।
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