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नापखेत और राजस्व भूमि में सड़क निर्माण पर अड़ंगा लगाने पर भड़के ग्रामीण
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सड़क निर्माण के लिए डीएफओ कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते ग्राम पंचायत जौरासी के ग्रामीण।
- फोटो : KOTDWAR
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कोटद्वार। दुगड्डा ब्लॉक के जौरासी-स्यालनी-स्यालकंडी मार्ग के निर्माण में आ रही बाधाओं से ग्रामीण भड़के हुए हैं। शुक्रवार को लोगों ने लैंसडौन के डीएफओ और एसडीएम कोटद्वार से मुलाकात कर समस्या का समाधान करने की मांग की है। दोनों अधिकारियों ने ग्रामीणों को उनकी समस्या का जल्द समाधान करने का भरोसा दिलाया है।
शुक्रवार को भाजपा पर्वतीय मंडल के अध्यक्ष और निवर्तमान प्रधान चंडी प्रसाद कुकरेती के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम योगेश मेहरा और लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ अखिलेश तिवारी से उनके कार्यालय में मिला। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ लोग स्थानीय राजनीति से प्रेरित होकर उक्त मोटर मार्ग का समरेखण वन क्षेत्र में होने की अफवाह फैलाते हुए मोटर मार्ग के निर्माण कार्य को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वन विभाग, राजस्व विभाग और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों द्वारा पूर्व में मार्ग का संयुक्त निरीक्षण किया जा चुका है। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि मोटर मार्ग का निर्माण शत-प्रतिशत काश्तकारों के नापखेत और राजस्व भूमि में किया जा रहा है। मोटर मार्ग आरक्षित वन क्षेत्र से बाहर है। ग्रामीणों ने कहा कि संयुक्त निरीक्षण के बाद भी वन विभाग द्वारा मार्ग निर्माण कार्य की लिखित अनुमति अभी तक प्रदान नहीं की गई है, जिससे निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। एसडीएम योगेश मेहरा ने राजस्व विभाग, वन विभाग और कार्यदायी संस्था पीएमजीएसवाई को 31 अगस्त को मौके पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए ताकि विवादित डंपिंग जोन की पुष्टि की जा सके। दोनों अधिकारियों ने ग्रामीणों को 7.5 किमी से आगे रोड कटिंग का कार्य जल्द से जल्द शुरू करवाने का भरोसा दिया और ग्रामीणों से दो सितंबर से तहसील में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को स्थगित करने का अनुरोध किया। प्रतिनिधिमंडल में सत्यप्रकाश जखमोला, चंद्रमोहन गौड़, शिरोमणि केष्टवाल, प्रकाश चंद्र, जितार सिंह, जगदीश सिंह, मनोज कुमार, सोहनलाल, जयप्रकाश, ओमप्रकाश, पीतांबर दत्त, हेमंत गौड़, अशोक कुमार व बलदेव प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को भाजपा पर्वतीय मंडल के अध्यक्ष और निवर्तमान प्रधान चंडी प्रसाद कुकरेती के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल एसडीएम योगेश मेहरा और लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ अखिलेश तिवारी से उनके कार्यालय में मिला। ग्रामीणों ने कहा कि कुछ लोग स्थानीय राजनीति से प्रेरित होकर उक्त मोटर मार्ग का समरेखण वन क्षेत्र में होने की अफवाह फैलाते हुए मोटर मार्ग के निर्माण कार्य को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वन विभाग, राजस्व विभाग और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों द्वारा पूर्व में मार्ग का संयुक्त निरीक्षण किया जा चुका है। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि मोटर मार्ग का निर्माण शत-प्रतिशत काश्तकारों के नापखेत और राजस्व भूमि में किया जा रहा है। मोटर मार्ग आरक्षित वन क्षेत्र से बाहर है। ग्रामीणों ने कहा कि संयुक्त निरीक्षण के बाद भी वन विभाग द्वारा मार्ग निर्माण कार्य की लिखित अनुमति अभी तक प्रदान नहीं की गई है, जिससे निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। एसडीएम योगेश मेहरा ने राजस्व विभाग, वन विभाग और कार्यदायी संस्था पीएमजीएसवाई को 31 अगस्त को मौके पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए ताकि विवादित डंपिंग जोन की पुष्टि की जा सके। दोनों अधिकारियों ने ग्रामीणों को 7.5 किमी से आगे रोड कटिंग का कार्य जल्द से जल्द शुरू करवाने का भरोसा दिया और ग्रामीणों से दो सितंबर से तहसील में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को स्थगित करने का अनुरोध किया। प्रतिनिधिमंडल में सत्यप्रकाश जखमोला, चंद्रमोहन गौड़, शिरोमणि केष्टवाल, प्रकाश चंद्र, जितार सिंह, जगदीश सिंह, मनोज कुमार, सोहनलाल, जयप्रकाश, ओमप्रकाश, पीतांबर दत्त, हेमंत गौड़, अशोक कुमार व बलदेव प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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