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आत्मचिंतन से मुक्ति का मार्ग होगा प्रशस्त
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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार के गणित विभाग और देवभूमि विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय आध्यात्म विज्ञान की वर्तमान में प्रासंगिकता’ विषय पर गूगल मीट एवं यू-ट्यूब के माध्यम से एक दिवसीय राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने भारतीय आध्यात्म विज्ञान दर्शन पर चर्चा करते हुए कहा कि आध्यात्म दर्शन में ही विज्ञान समाया हुआ है। आत्मचिंतन और ज्ञान के अनुरूप आचरण ही मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विशिष्ठ अतिथि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि भारतवर्ष की समस्त पूंजी उसकी आध्यात्मिक संपदा है। आत्मा की विशेषताओं को जीवन में लाने की या आचरण में लाने की प्रक्रिया ही आध्यात्मिकता है। जीवन में प्रदर्शन, नाटक और आडंबर व्यक्ति को आध्यात्मिकता से दूर लेकर जाते हैं। मुख्य वक्ता महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय भोपाल (मध्य प्रदेश) के प्रो. निलिम्प त्रिपाठी ने कहा कि सत्य बोलने से आनंद की सहज अनुभूति होती है और कामनाओं की गांठ से विमुक्तता ही आध्यात्मिकता की ओर व्यक्ति को अग्रसर करती है। विशिष्ठ वक्ता हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने आधुनिक विज्ञान में पौराणिक ग्रंथों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। प्राचार्य प्रो. जानकी पंवार ने कहा कि कोविड-19 ने संपूर्ण विश्व को सबक दिया है कि जीवन का अर्थ मात्र भौतिक आकांक्षा या कामनाएं नहीं है। गोष्ठी का संचालन डॉ. तृप्ति दीक्षित ने किया।
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संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विशिष्ठ अतिथि अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि भारतवर्ष की समस्त पूंजी उसकी आध्यात्मिक संपदा है। आत्मा की विशेषताओं को जीवन में लाने की या आचरण में लाने की प्रक्रिया ही आध्यात्मिकता है। जीवन में प्रदर्शन, नाटक और आडंबर व्यक्ति को आध्यात्मिकता से दूर लेकर जाते हैं। मुख्य वक्ता महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय भोपाल (मध्य प्रदेश) के प्रो. निलिम्प त्रिपाठी ने कहा कि सत्य बोलने से आनंद की सहज अनुभूति होती है और कामनाओं की गांठ से विमुक्तता ही आध्यात्मिकता की ओर व्यक्ति को अग्रसर करती है। विशिष्ठ वक्ता हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने आधुनिक विज्ञान में पौराणिक ग्रंथों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। प्राचार्य प्रो. जानकी पंवार ने कहा कि कोविड-19 ने संपूर्ण विश्व को सबक दिया है कि जीवन का अर्थ मात्र भौतिक आकांक्षा या कामनाएं नहीं है। गोष्ठी का संचालन डॉ. तृप्ति दीक्षित ने किया।
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