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Kotdwar News: बिजली की लाइनों के पास खड़े पेड़ों का वन विभाग कराएगा सर्वे
Wed, 12 Aug 2026 07:33 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Wed, 12 Aug 2026 07:33 PM IST
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दुगड्डा (कोटद्वार)। लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार के दुगड्डा रेंज के अंतर्गत आरक्षित वन क्षेत्र से गुजरने वाली विद्युत लाइनों के आसपास के पेड़ों का वन विभाग सर्वे कराएगा। इसका उद्देश्य आंधी, तूफान और बारिश के दौरान पेड़ों के विद्युत लाइनों पर गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं, वन्यजीव और मानव क्षति को रोकना है।
ऊर्जा निगम की ओर से पर्वतीय क्षेत्रों के गांवों के ग्रामीणों को विद्युत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आरक्षित वन क्षेत्र के जंगलों के बीच विद्युत पोल स्थापित कर लाइनें बिछाई हैं। विद्युतीकरण के बाद लाइन के नीचे और आसपास प्राकृतिक रूप से उगे पौधे अब बड़े पेड़ों का रूप ले चुके हैं। रखरखाव के अभाव में कई स्थानों पर पेड़ों की ऊंचाई विद्युत लाइनों तक पहुंच गई है। ऐसे में तेज हवा और बारिश के दौरान पेड़ों के लाइन से टकराने या गिरने से शॉर्ट सर्किट का खतरा बना रहता है।
इससे विद्युत आपूर्ति बाधित होने के साथ उपभोक्ताओं को भी परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं, उच्च पारेषण विद्युत लाइनों के संपर्क में आने से वन्यजीवों की जान को भी खतरा रहता है। विद्युत लाइनों के आसपास पेड़ों की लॉपिंग वन विभाग की अनुमति के बाद ही की जाती है, जबकि पेड़ों के पातन के लिए उच्च अधिकारियों की वैध अनुमति आवश्यक होती है।
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विद्युत लाइनों के निकट आने वाले पेड़ों का शीघ्र सर्वे कराया जाएगा। सर्वे कार्य पूरा होने के बाद रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
- रमेश चंद्र सिंह नेगी, रेंजर दुगड्डा।
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ऊर्जा निगम की ओर से पर्वतीय क्षेत्रों के गांवों के ग्रामीणों को विद्युत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आरक्षित वन क्षेत्र के जंगलों के बीच विद्युत पोल स्थापित कर लाइनें बिछाई हैं। विद्युतीकरण के बाद लाइन के नीचे और आसपास प्राकृतिक रूप से उगे पौधे अब बड़े पेड़ों का रूप ले चुके हैं। रखरखाव के अभाव में कई स्थानों पर पेड़ों की ऊंचाई विद्युत लाइनों तक पहुंच गई है। ऐसे में तेज हवा और बारिश के दौरान पेड़ों के लाइन से टकराने या गिरने से शॉर्ट सर्किट का खतरा बना रहता है।
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इससे विद्युत आपूर्ति बाधित होने के साथ उपभोक्ताओं को भी परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं, उच्च पारेषण विद्युत लाइनों के संपर्क में आने से वन्यजीवों की जान को भी खतरा रहता है। विद्युत लाइनों के आसपास पेड़ों की लॉपिंग वन विभाग की अनुमति के बाद ही की जाती है, जबकि पेड़ों के पातन के लिए उच्च अधिकारियों की वैध अनुमति आवश्यक होती है।
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विद्युत लाइनों के निकट आने वाले पेड़ों का शीघ्र सर्वे कराया जाएगा। सर्वे कार्य पूरा होने के बाद रिपोर्ट अग्रिम कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
- रमेश चंद्र सिंह नेगी, रेंजर दुगड्डा।