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काश्तकार कर सकेंगे फसलों की कटाई और मंडाई

Tue, 07 Apr 2020 07:30 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2020 07:30 PM IST
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Tenants will be able to harvest and harvest crops
लॉकडाउन के दौरान काश्तकार अपनी फसलों की कटाई, मंडाई और फसलों की बिक्री कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें संबंधित तहसीलों से अनुमति लेनी होगी। कटाई, मंडाई और अन्य कृषि कार्य के लिए एक साथ पांच से अधिक लोगों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इस दौरान भी उन्हें सोशल डिस्टेंस का पालन करना होगा। इस संबंध में डीएम ने संबंधित विभागों और तहसीलों को दिशा निर्देश जारी किए हैं।
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कोटद्वार भाबर समेत पौड़ी जिले के सभी क्षेत्रों में इन दिनों खेती शुरू हो गई है। इसके देखते हुए सभी कार्यालयाध्यक्षों को परिवहन, वाहन चालक, श्रमिक आदि से संबंधित कार्य से जुड़े पास, अनुमति देने के निर्देश दिए गए हैं। फसलों को भंडारण एवं मंडी स्थल तक कृषि उत्पादों के लिए परिवहन सुचारु रूप से चलाने, कृषि उपकरणों की प्रयोग की अनुमति रहेगी। एक कंबाइन हारवेस्टर के संचालन के लिए अधिकतम 5 व्यक्तियों की अनुमन्यता होगी। कोटद्वार एसडीएम योगेश मेहरा ने कहा कि काश्तकार अनुमति के लिए आवेदन कर सकते हैं। कहा कि रबी की फसलों की कटाई, मंडाई, भंडारण, विपणन, जायद फसलों की बुवाई के लिए कृषि निवेश, बीज, पौधे की व्यवस्था, उर्वरक व्यवस्था, परिवहन की व्यवस्था, गो संरक्षण केंद्रों आदि पर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
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लॉकडाउन : गांव में खेती में जुटे लोग
बैजरो। लॉकडाउन के चलते जहां मैदानी इलाकों में सन्नाटा पसरा है वहीं आमतौर पर वीरान पड़े गांवों की रौनक देखते ही बन रही है। प्रवासी गांव पहुंचे हुए हैं। गांवों में अब भी रोजमर्रा की ही तरह जीवन चल रहा है। लोग सुबह से खेतों में काम में जुट जाते हैं। पुरुष खेतों में हल जोतकर खरीफ की फसलों की बुवाई की तैयारी में जुटे हैं, वहीं महिलाएं भी जंगल से चारापत्ती ला रही हैं। खेतों में साग सब्जियों और फसलों की निराई-गुड़ाई में पूरा दिन निकल जा रहा है। इस दौरान वह सोशल डिस्टेंस का भी बखूबी पालन कर रहे हैं।
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पौड़ी गढ़वाल जिले के बीरोंखाल, रिखणीखाल, नैनीडांडा, दुगड्डा, जयहरीखाल, यमकेश्वर, एकेश्वर और पोखड़ा में इन दिनों प्रवासियों और उनके बच्चों की चहल-पहल बनी है। मैठाणाघाट के धर्मवीर सिंह रावत बताते हैं कि गांवों के लोग अब साग सब्जियां टमाटर, शिमला मिर्च, गोभी, खीरा, कद्दू उगाने पर जोर दे रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण खरीफ की फसलों के साथ ही विभिन्न दालों की बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। ग्राम बंगार निवासी व दुकानदार शरदभूषण का कहना है कि पहले दुकानदारी में व्यस्त रहते थे, लेकिन अब दोपहर खेतों में चले जाते हैं और परिजनों का सहयोग कर रहे हैं। महानगरों से बड़ी संख्या में गांव पहुंचे युवा भी खेतीबाड़ी में परिजनों का सहयोग कर रहे हैं। रुद्रपुर के उद्योगपति और ग्राम खैतोली निवासी दीपक ढौंडियाल भी रुद्रपुर से अपने गांव लौट आए हैं। उन्होंने यहां धान की खेती फिर से शुरू कर दी है। बीरोंखाल में जैविक कृषि के मास्टर ट्रेनर विनोद नेगी प्रवासियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
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