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नगर निगम के नोटिस के खिलाफ दायर याचिका खारिज, भवन स्वामियों को झटका
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एनएच के फुटपाथ और नगर निगम की नजूल भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर नगर आयुक्त की ओर से जारी नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट नैनीताल में दायर याचिकाएं खारिज हो गई हैं। हाईकोर्ट से कोई राहत न मिलने से एक बार फिर शहर में नगर निगम की जेसीबी गरजने की आशंका बढ़ गई है।
हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने झंडाचौक से मालवीय उद्यान तक 43 अतिक्रमण चिह्नित कर जनसुनवाई की गई। इसके बाद गत 21 मार्च को नगर निगम की ओर से अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर 31 मार्च तक अतिक्रमण हटाने को कहा गया था। नोटिस जारी होने के बाद कुछ भवन स्वामी और व्यापारी नगर आयुक्त की ओर से जारी नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गए। हाईकोर्ट ने व्यापारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने जनसुनवाई पूरी होने के बाद गत 13 अप्रैल को अपने फैसले को सुरक्षित रखा था। साथ ही गत 25 अप्रैल को मामले में अपना फैसला सुनाया। हाईकोर्ट का फैसला नगर निगम को प्राप्त हो गया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कहीं भी यह तथ्य नहीं दिए हैं कि उनकी ओर से नजूल भूमि के फुटपाथ पर अतिक्रमण नहीं किया गया है। हाईकोर्ट के जनहित याचिका पर दिए गए फैसले के आधार पर ही नगर आयुक्त की ओर से जांच एवं नोटिस जारी किए गए हैं। नगर आयुक्त की ओर से नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर अतिक्रमणकारियों को प्रदान किया गया है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उक्त आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता है। कोर्ट ने पर्याप्त तथ्य प्रस्तुत न करने पर रिट याचिकाएं निरस्त कर दी। वहीं नगर आयुक्त केएस नेगी ने बताया कि कोर्ट ने व्यापारियों की ओर से दायर याचिकाएं निरस्त कर दी हैं। प्रशासन से पुलिस बल की मांग की गई है। फोर्स उपलब्ध होने पर अतिक्रमण हटाया जाएगा।
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हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम ने झंडाचौक से मालवीय उद्यान तक 43 अतिक्रमण चिह्नित कर जनसुनवाई की गई। इसके बाद गत 21 मार्च को नगर निगम की ओर से अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर 31 मार्च तक अतिक्रमण हटाने को कहा गया था। नोटिस जारी होने के बाद कुछ भवन स्वामी और व्यापारी नगर आयुक्त की ओर से जारी नोटिस के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंच गए। हाईकोर्ट ने व्यापारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने जनसुनवाई पूरी होने के बाद गत 13 अप्रैल को अपने फैसले को सुरक्षित रखा था। साथ ही गत 25 अप्रैल को मामले में अपना फैसला सुनाया। हाईकोर्ट का फैसला नगर निगम को प्राप्त हो गया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कहीं भी यह तथ्य नहीं दिए हैं कि उनकी ओर से नजूल भूमि के फुटपाथ पर अतिक्रमण नहीं किया गया है। हाईकोर्ट के जनहित याचिका पर दिए गए फैसले के आधार पर ही नगर आयुक्त की ओर से जांच एवं नोटिस जारी किए गए हैं। नगर आयुक्त की ओर से नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर अतिक्रमणकारियों को प्रदान किया गया है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उक्त आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता है। कोर्ट ने पर्याप्त तथ्य प्रस्तुत न करने पर रिट याचिकाएं निरस्त कर दी। वहीं नगर आयुक्त केएस नेगी ने बताया कि कोर्ट ने व्यापारियों की ओर से दायर याचिकाएं निरस्त कर दी हैं। प्रशासन से पुलिस बल की मांग की गई है। फोर्स उपलब्ध होने पर अतिक्रमण हटाया जाएगा।
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