{"_id":"6aeb22ddfec1487a35055028","slug":"ordered-to-vacate-the-shop-within-one-month-kotdwar-news-c-49-1-sdrn1007-127852-2026-11-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kotdwar News: एक माह में दुकान खाली करने का दिया आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kotdwar News: एक माह में दुकान खाली करने का दिया आदेश
Wed, 04 Nov 2026 05:49 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Wed, 04 Nov 2026 05:49 PM IST
विज्ञापन
कोटद्वार। मालगोदाम रोड स्थित दुकान के मालिकाना हक को लेकर करीब छह साल से चल रहे विवाद में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) मनोज कुमार द्विवेदी की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने दुकान का मालिकाना हक अमरदीप शर्मा का माना है और दुकान पर काबिज बलराम भाटिया और तिलकराज भाटिया को बेदखल करने का आदेश दिया है। अदालत ने दोनों को फैसला सुनाए जाने की तिथि से एक माह के भीतर दुकान से अपना सामान हटाकर शांतिपूर्वक कब्जा वादी को सौंपने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं करने पर वादी न्यायालय के माध्यम से दुकान का कब्जा प्राप्त कर सकेगा।
मामले के अनुसार, अमरदीप शर्मा ने वर्ष 2012 में मालगोदाम रोड स्थित विवादित संपत्ति को जिलाधिकारी पौड़ी से फ्रीहोल्ड कराया था। उनका दावा था कि दुकान की देखभाल के लिए उन्होंने बलराम और तिलकराज भाटिया को जिम्मेदारी दी थी, लेकिन बाद में दोनों ने दुकान पर कब्जा कर लिया।
वहीं, प्रतिवादियों का कहना था कि अमरदीप ने 13 फरवरी 1996 को दुकान महेंद्र कुमार ओबराय को बेच दी थी और ओबराय ने 16 मार्च 2012 को पंजीकृत बैनामे के जरिये उन्हें दुकान बेच दी थी। अदालत ने पाया कि प्रतिवादी अपने दावे के समर्थन में न तो बिक्री विलेख पेश कर सके और न ही कोई मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
अदालत ने फ्रीहोल्ड दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों के आधार पर अमरदीप शर्मा को संपत्ति का वैध स्वामी माना। हालांकि, दुकान पर प्रतिवादियों का कब्जा पाया गया। इससे पहले वर्ष 2017 में इसी संपत्ति को लेकर दायर वाद में भी अदालत ने बलराम और तिलकराज को दुकान का मालिक नहीं माना था और उन्हें विधिक प्रक्रिया अपनाए बिना बेदखल करने से रोका था। वर्तमान वाद में अदालत ने वादी के पक्ष में आदेशात्मक डिक्री पारित करते हुए वाद का खर्च भी प्रतिवादियों से दिलाने के निर्देश दिए।
विज्ञापन
मामले के अनुसार, अमरदीप शर्मा ने वर्ष 2012 में मालगोदाम रोड स्थित विवादित संपत्ति को जिलाधिकारी पौड़ी से फ्रीहोल्ड कराया था। उनका दावा था कि दुकान की देखभाल के लिए उन्होंने बलराम और तिलकराज भाटिया को जिम्मेदारी दी थी, लेकिन बाद में दोनों ने दुकान पर कब्जा कर लिया।
विज्ञापन
वहीं, प्रतिवादियों का कहना था कि अमरदीप ने 13 फरवरी 1996 को दुकान महेंद्र कुमार ओबराय को बेच दी थी और ओबराय ने 16 मार्च 2012 को पंजीकृत बैनामे के जरिये उन्हें दुकान बेच दी थी। अदालत ने पाया कि प्रतिवादी अपने दावे के समर्थन में न तो बिक्री विलेख पेश कर सके और न ही कोई मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
अदालत ने फ्रीहोल्ड दस्तावेजों और अन्य अभिलेखों के आधार पर अमरदीप शर्मा को संपत्ति का वैध स्वामी माना। हालांकि, दुकान पर प्रतिवादियों का कब्जा पाया गया। इससे पहले वर्ष 2017 में इसी संपत्ति को लेकर दायर वाद में भी अदालत ने बलराम और तिलकराज को दुकान का मालिक नहीं माना था और उन्हें विधिक प्रक्रिया अपनाए बिना बेदखल करने से रोका था। वर्तमान वाद में अदालत ने वादी के पक्ष में आदेशात्मक डिक्री पारित करते हुए वाद का खर्च भी प्रतिवादियों से दिलाने के निर्देश दिए।