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Kotdwar News: युवा संवाद कार्यक्रम में नवीन बिष्ट रहे प्रथम
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कोटद्वार। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार की एनएसएस इकाई की ओर से युवा एवं खेल मंत्रालय के निर्देशानुसार बृहस्पतिवार को युवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें नवीन बिष्ट ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। युवा संवाद इंडिया 2047 कार्यक्रम भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प है। वर्ष 2022 से लेकर 2047 तक के काल को प्रधानमंत्री ने अमृत काल का नाम दिया है इस काल में हमें हर तरह से अपने राष्ट्र को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाना है जिसमें पंच प्रण प्रतिज्ञा को आधार बनाकर समग्र रूप से भारत को एक युवा देश के रूप में प्रतिष्ठित करना हैl
शुभारंभ एनएसएस सांग के साथ हुआ। इस मौके पर भारत के पंच प्रण-एक युवा परिचय शीर्षक पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। इस प्रतियोगिता में नवीन बिष्ट, प्रज्ज्वल, अनिकेत ने क्रमशङ प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायक मंडल में डॉ. बीएस रावत, डॉ. सुरेखा घिल्डियाल और डॉ. प्रियम अग्रवाल शामिल रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. भगवत सिंह रावत ने स्वयंसेवियों को अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ और समावेशी बनाने के लिए अनेक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। साथ ही डिजिटल इकोनॉमिक्स की उपयोगिता भी बताई। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डीएस नेगी ने स्वयंसेवियों का मार्गदर्शन करते हुए अपने जीवन के अनुभव साझा किए और धन की महता बताते हुए नैतिकता पूर्ण आचरण करने के लिए छात्रों को प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रोशनी असवाल ने कार्यक्रम के अंत में सभी का धन्यवाद करते हुए स्वयंसेवियों को किसी एक क्षेत्र में स्किल डेवलप करने आह्वान किया, जिससे वह अपने जीवन निर्वाह को सुगमता से कर सके। इस अवसर पर डॉ. जुनीश कुमार, डॉ. अरुणिमा, डॉ. विजयलक्ष्मी, वीरेंद्र सैनी, लीला देवी आदि मौजूद रहे।
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शुभारंभ एनएसएस सांग के साथ हुआ। इस मौके पर भारत के पंच प्रण-एक युवा परिचय शीर्षक पर आयोजित संवाद कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। इस प्रतियोगिता में नवीन बिष्ट, प्रज्ज्वल, अनिकेत ने क्रमशङ प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायक मंडल में डॉ. बीएस रावत, डॉ. सुरेखा घिल्डियाल और डॉ. प्रियम अग्रवाल शामिल रहे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. भगवत सिंह रावत ने स्वयंसेवियों को अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ और समावेशी बनाने के लिए अनेक उदाहरणों के माध्यम से समझाया। साथ ही डिजिटल इकोनॉमिक्स की उपयोगिता भी बताई। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डीएस नेगी ने स्वयंसेवियों का मार्गदर्शन करते हुए अपने जीवन के अनुभव साझा किए और धन की महता बताते हुए नैतिकता पूर्ण आचरण करने के लिए छात्रों को प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रोशनी असवाल ने कार्यक्रम के अंत में सभी का धन्यवाद करते हुए स्वयंसेवियों को किसी एक क्षेत्र में स्किल डेवलप करने आह्वान किया, जिससे वह अपने जीवन निर्वाह को सुगमता से कर सके। इस अवसर पर डॉ. जुनीश कुमार, डॉ. अरुणिमा, डॉ. विजयलक्ष्मी, वीरेंद्र सैनी, लीला देवी आदि मौजूद रहे।
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