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जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचने का उपाय है मिश्रित खेती
श्रीनगर
Updated Tue, 01 Dec 2015 10:20 PM IST
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पर्वतीय विकास शोध केंद्र ने मिश्रित वन, खेती एवं सूक्ष्म जलवायु निर्माण पर तैयार रिपोर्ट को जारी किया गया। इसमें जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचने का एकमात्र उपाय मिश्रित वन, खेती एवं सूक्ष्म जलवायु निर्माण को बताया गया है। रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेजी गई है।
मंगलवार को मिश्रित वन, खेती एवं सूक्ष्म जलवायु निर्माण पर तैयार रिपोर्ट को मुख्य अतिथि गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एमएसएम रावत व पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने जारी किया। इस मौके पर प्रो. एमएसएम रावत ने कहा कि उत्तराखंड में सामुदायिक संगठनों की ओर से समय-समय पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने व समस्याओं से निपटने के लिए अनेक उपाय सुझाए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिपको आंदोलन के जरिए वनों को बचाने व जगत सिंह जंगली द्वारा मिश्रित वनों को उगाने का संदेश दिया जा रहा है। पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने कहा कि लोक आधारित ज्ञान, आंदोलनों के अनुभवों व सीखों को जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना में शामिल किए जाने की आवश्यकता है।
डॉ. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं जन जागरूकता को बढ़ावा दिए जाने, प्रभावों को बारीकी से समझने, उत्तराखंड के जलवायु परिवर्तन को कार्ययोजना में शामिल किए जाने के लिए प्रयास किए जा रहे है। गंगा आरती समिति के अध्यक्ष प्रेम बल्लभ नैथानी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक पंच वर्षीय प्लान तैयार किए जाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर शोध छात्र नवीन नौटियाल, डॉ. कविता भट्ट, विनिता सेमवाल, बसंती नेगी, यशोदा खंडूड़ी आदि मौजूद थे।
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मंगलवार को मिश्रित वन, खेती एवं सूक्ष्म जलवायु निर्माण पर तैयार रिपोर्ट को मुख्य अतिथि गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एमएसएम रावत व पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने जारी किया। इस मौके पर प्रो. एमएसएम रावत ने कहा कि उत्तराखंड में सामुदायिक संगठनों की ओर से समय-समय पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने व समस्याओं से निपटने के लिए अनेक उपाय सुझाए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिपको आंदोलन के जरिए वनों को बचाने व जगत सिंह जंगली द्वारा मिश्रित वनों को उगाने का संदेश दिया जा रहा है। पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने कहा कि लोक आधारित ज्ञान, आंदोलनों के अनुभवों व सीखों को जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना में शामिल किए जाने की आवश्यकता है।
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डॉ. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एवं जन जागरूकता को बढ़ावा दिए जाने, प्रभावों को बारीकी से समझने, उत्तराखंड के जलवायु परिवर्तन को कार्ययोजना में शामिल किए जाने के लिए प्रयास किए जा रहे है। गंगा आरती समिति के अध्यक्ष प्रेम बल्लभ नैथानी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक पंच वर्षीय प्लान तैयार किए जाने की आवश्यकता है। इस अवसर पर शोध छात्र नवीन नौटियाल, डॉ. कविता भट्ट, विनिता सेमवाल, बसंती नेगी, यशोदा खंडूड़ी आदि मौजूद थे।
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