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एक परिसर में तीन स्कूल, टिन शेड में दफ्तर
ब्यूरो/ अमर उजाला कोटद्वार
Updated Sat, 06 Feb 2016 06:32 PM IST
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मालगोदाम रोड स्थित राजकीय जूनियर हाईस्कूल बालक का परिसर, जहां एक परिसर में तीन स्कूल चल रहे हैं और तीनों बदहाल हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इन स्कूलों की दशा देखने और समझने के लिए फुर्सत नहीं है।
बता दें कि स्थान का अभाव, जर्जर भवन, बदहाल प्रांगण के चलते आए दिन जूनियर और प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों के बीच विवाद की स्थिति बनी रहती है। हाल में यहां पेड़ काटकर किचन निर्माण को लेकर उभरा विवाद भी इसी का नतीजा है।
राजकीय जूनियर हाईस्कूल (बालक)
यह जिले का सबसे अधिक छात्र संख्या वाला जूनियर हाईस्कूल हैं, जहां की छात्र संख्या 183 है। स्कूल का भवन जर्जर है। वर्ष 1964 में स्थापित यह स्कूल अब जर्जर हालत में है। स्थिति यह है कि नगरपालिका और लोनिवि इस भवन को पांच साल पहले निष्प्रयोज्य घोषित कर ध्वस्त करने का फरमान सुना चुकी है। यहां पठन-पाठन करना और करवाना खतरे से खाली नहीं है। बच्चों को बरामदे में पढ़ाई करनी पड़ रही है। बरसात में पानी टपकने, छत का प्लास्टर गिरने और दीवारों पर दरारें आने के कारण मजबूरन विद्यालय प्रशासन को वर्ष 2008 में कक्षों को बंद करना पड़ा। प्रधानाध्यापक नसीम अहमद बताते हैं कि विद्यालय की स्थिति अधिकारियों के संज्ञान में है। पुनर्निर्माण के लिए बजट की दरकार है। छह से आठ तक की तीन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए यहां प्रधानाध्यापक समेत पांच शिक्षक तैनात हैं। इस विद्यालय परिसर में बाद के वर्षों में पहले सात नंबर प्राथमिक स्कूल खोला गया। बाद में गंगादत्त जोशी मार्ग पर चलने वाले पांच नंबर स्कूल को भी यहां शिफ्ट कर दिया गया।
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प्राथमिक विद्यालय नंबर-सात
वर्ष 1998 में जूनियर हाईस्कूल परिसर में शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालय नंबर सात को खोल दिया गया। यहां पांच कक्षाएं संचालित होती हैं, लेकिन पांचों कक्षाओं में मात्र 52 बच्चे अध्ययनरत हैं। यहां दो शिक्षिकाएं तैनात हैं, जिसमें एक कभी मेडिकल तो कभी सीसीएल पर रहती हैं। ज्यादातर एक शिक्षिका पांच कक्षाओं को पढ़ाती है। बच्चों के बैठने के लिए एक संस्था ने मेज, कुर्सी उपलब्ध कराई हैं। विद्यालय ने अपना एक कमरा पटेलनगर से यहां शिफ्ट हुए पांच नंबर स्कूल को व्यवस्था पर दे रखा है।
प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच की हालत शरणार्थी जैसी
पूर्व में पटेलनगर के पीछे गंगादत्त जोशी मार्ग पर चलने वाले प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच को वर्ष 2003 में यहां विषम हालात में शिफ्ट करना पड़ा। जूनियर हाईस्कूल बालिका की भूमि और भवन पर कब्जा होने और मुकदमा हार जाने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बालिका जूनियर हाईस्कूल को अन्यत्र शिफ्ट करने के बजाय उसके पड़ोस में चल रहे प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच को वहां से माल गोदाम रोड पर शिफ्ट कर दिया। जहां पंद्रह साल बाद भी इस स्कूल की स्थिति शरणार्थियों जैसी है। यह जूनियर हाईस्कूल बालक के एक टिन शेड में चल रहा है। जहां एक कमरे में दफ्तर के साथ तीन कक्षाएं चल रही हैं। हर कक्षा के बच्चों का मुंह अलग-अलग दिशा में होता है। एक साथ कैसे तीन कक्षाएं चल रही होंगी। अंदाजा स्वयं ही लगाया जा सकता है। बीच में दोनों प्राथमिक स्कूलों को एक करने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। इस विद्यालय में एक से पांच तक की कक्षाओं में 75 बच्चे पढ़ते हैं। एक कमरा पड़ोस के सात नंबर स्कूल से व्यवस्था पर लिया गया है। हाल में इस विद्यालय के प्रागंण में जूनियर हाईस्कूल के शिक्षक ने पेड़ कटवाकर किचन निर्माण शुरू करा दिया था, जो विवाद के बाद काम रुका हुआ है। एक टिन शेड में अलग-अलग दिशाओं में मुंह करके चलती हैं तीन कक्षाएं
कोट
एक परिसर में तीन स्कूल चलने और इससे उपज रही परेशानी अधिकारियों के संज्ञान में है। पांच नंबर स्कूल को अन्यत्र शिफ्ट कराने पर विचार चल रहा है। फिलहाल बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। जर्जर भवन का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। बजट उपलब्ध होने पर पुनर्निर्माण कराया जाएगा।
- मोनिका बम, प्रभारी बीईओ दुगड्डा ब्लाक
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बता दें कि स्थान का अभाव, जर्जर भवन, बदहाल प्रांगण के चलते आए दिन जूनियर और प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों के बीच विवाद की स्थिति बनी रहती है। हाल में यहां पेड़ काटकर किचन निर्माण को लेकर उभरा विवाद भी इसी का नतीजा है।
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राजकीय जूनियर हाईस्कूल (बालक)
यह जिले का सबसे अधिक छात्र संख्या वाला जूनियर हाईस्कूल हैं, जहां की छात्र संख्या 183 है। स्कूल का भवन जर्जर है। वर्ष 1964 में स्थापित यह स्कूल अब जर्जर हालत में है। स्थिति यह है कि नगरपालिका और लोनिवि इस भवन को पांच साल पहले निष्प्रयोज्य घोषित कर ध्वस्त करने का फरमान सुना चुकी है। यहां पठन-पाठन करना और करवाना खतरे से खाली नहीं है। बच्चों को बरामदे में पढ़ाई करनी पड़ रही है। बरसात में पानी टपकने, छत का प्लास्टर गिरने और दीवारों पर दरारें आने के कारण मजबूरन विद्यालय प्रशासन को वर्ष 2008 में कक्षों को बंद करना पड़ा। प्रधानाध्यापक नसीम अहमद बताते हैं कि विद्यालय की स्थिति अधिकारियों के संज्ञान में है। पुनर्निर्माण के लिए बजट की दरकार है। छह से आठ तक की तीन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए यहां प्रधानाध्यापक समेत पांच शिक्षक तैनात हैं। इस विद्यालय परिसर में बाद के वर्षों में पहले सात नंबर प्राथमिक स्कूल खोला गया। बाद में गंगादत्त जोशी मार्ग पर चलने वाले पांच नंबर स्कूल को भी यहां शिफ्ट कर दिया गया।
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प्राथमिक विद्यालय नंबर-सात
वर्ष 1998 में जूनियर हाईस्कूल परिसर में शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालय नंबर सात को खोल दिया गया। यहां पांच कक्षाएं संचालित होती हैं, लेकिन पांचों कक्षाओं में मात्र 52 बच्चे अध्ययनरत हैं। यहां दो शिक्षिकाएं तैनात हैं, जिसमें एक कभी मेडिकल तो कभी सीसीएल पर रहती हैं। ज्यादातर एक शिक्षिका पांच कक्षाओं को पढ़ाती है। बच्चों के बैठने के लिए एक संस्था ने मेज, कुर्सी उपलब्ध कराई हैं। विद्यालय ने अपना एक कमरा पटेलनगर से यहां शिफ्ट हुए पांच नंबर स्कूल को व्यवस्था पर दे रखा है।
प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच की हालत शरणार्थी जैसी
पूर्व में पटेलनगर के पीछे गंगादत्त जोशी मार्ग पर चलने वाले प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच को वर्ष 2003 में यहां विषम हालात में शिफ्ट करना पड़ा। जूनियर हाईस्कूल बालिका की भूमि और भवन पर कब्जा होने और मुकदमा हार जाने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बालिका जूनियर हाईस्कूल को अन्यत्र शिफ्ट करने के बजाय उसके पड़ोस में चल रहे प्राथमिक विद्यालय नंबर पांच को वहां से माल गोदाम रोड पर शिफ्ट कर दिया। जहां पंद्रह साल बाद भी इस स्कूल की स्थिति शरणार्थियों जैसी है। यह जूनियर हाईस्कूल बालक के एक टिन शेड में चल रहा है। जहां एक कमरे में दफ्तर के साथ तीन कक्षाएं चल रही हैं। हर कक्षा के बच्चों का मुंह अलग-अलग दिशा में होता है। एक साथ कैसे तीन कक्षाएं चल रही होंगी। अंदाजा स्वयं ही लगाया जा सकता है। बीच में दोनों प्राथमिक स्कूलों को एक करने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। इस विद्यालय में एक से पांच तक की कक्षाओं में 75 बच्चे पढ़ते हैं। एक कमरा पड़ोस के सात नंबर स्कूल से व्यवस्था पर लिया गया है। हाल में इस विद्यालय के प्रागंण में जूनियर हाईस्कूल के शिक्षक ने पेड़ कटवाकर किचन निर्माण शुरू करा दिया था, जो विवाद के बाद काम रुका हुआ है। एक टिन शेड में अलग-अलग दिशाओं में मुंह करके चलती हैं तीन कक्षाएं
कोट
एक परिसर में तीन स्कूल चलने और इससे उपज रही परेशानी अधिकारियों के संज्ञान में है। पांच नंबर स्कूल को अन्यत्र शिफ्ट कराने पर विचार चल रहा है। फिलहाल बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। जर्जर भवन का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। बजट उपलब्ध होने पर पुनर्निर्माण कराया जाएगा।
- मोनिका बम, प्रभारी बीईओ दुगड्डा ब्लाक