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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   Husband and wife killed in self-defense Guldar

आत्मरक्षा में पति-पत्नी ने गुलदार को मार गिराया

Thu, 04 Aug 2016 10:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला काोटद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला काोटद्वार Updated Thu, 04 Aug 2016 10:46 PM IST
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कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज के अंतर्गत तच्छाली गांव में पशुपालक पति-पत्नी ने आत्मरक्षा के लिए गुलदार को मार गिराया। घटना के बाद तुरंत उन्होंने वन अधिकारियों को जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों के बयान दर्ज कर गुलदार के शव को कब्जे में लिया। उपप्रभागीय वनाधिकारी जीसी बेलवाल तथ्यों की जांच में जुट गए हैं। घटना बुधवार शाम करीब पांच बजे की बताई जा रही है।

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दुगड्डा ब्लाक के घाड़ क्षेत्र के तच्छाली गांव में विजय कुमार बेवनी पुत्र गुणानंद अपनी पत्नी के साथ गांव से सटे जंगल से बकरियां चुगाकर लौट रहे थे। तभी गुलदार उनकी बकरियों पर हमला बोलकर एक बकरी को मारकर ले जाने लगा। दंपति के शोर मचाने पर गुलदार ने उन पर हमले की कोशिश की तो आत्मरक्षा के लिए दंपति ने पाठल से गुलदार के सिर पर प्रहार कर दिया। गुलदार बेहोश होकर गिर पड़ा। पति-पत्नी मौके से जाने लगे तभी गुस्साए गुलदार ने फिर उन पर हमला कर दिया। उन्होंने एक बार फिर पाठल से गुलदार पर प्रहार कर जान बचाई। इस बार पाठल गुलदार की कमर पर लगी। पाठल के प्रहार के बाद भी जब वह आगे बढ़ने लगा तो पत्नी-पत्नी जान बचाने की खातिर पहाड़ी पर चढ़ गए और गुलदार पर पत्थरों से वार किया। पत्थरों से हमले के दौरान गुलदार पहाड़ी से खाई में जा गिरा, जहां उसकी मौत हो गई। गुलदार के खाई में गिरने के बाद उन्होंने वन कर्मचारियों को घटना की जानकारी दी। बताया कि खुद की जान बचाने की खातिर उन्हें गुलदार पर हमला करना पड़ा, नहीं तो गुलदार उन्हें निवाला बना देता।
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रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल ने बताया कि गुलदार के सिर और कमर पर चोट के निशान हैं। गुलदार मादा है जिसकी उम्र करीब ढाई साल है। उसके सभी अंग सुरक्षित मिले हैं। पशु चिकित्सकों से उसका पोस्टमार्टम करवाने के बाद शव नष्ट कर दिया गया है। उपप्रभागीय वनाधिकारी जीसी बेलवाल ने बताया कि तथ्यों की जांच की जा रही है।
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आत्मरक्षा के लिए वन्यजीव को सद्भावना पूर्वक मारना या घायल करना अपराध नहीं
कोटद्वार। कानून के जानकारों का कहना कि यदि किसी भी वन्यजीव को आत्मरक्षा की खातिर सद्भावना पूर्वक मार दिया जाता है या फिर घायल कर दिया जाता है तो वह अपराध नहीं कहलाता है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 11 (2) में भी यह प्रावधान किया गया है। घाड़ के तच्छाली गांव की इस घटना को भी इसी श्रेणी का माना जा रहा है। हालांकि इस मामले में उपप्रभागीय अधिकारी जीसी बेलवाल ने घटनास्थल का निरीक्षण कर तथ्यों की जांच शुरू कर दी है।

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