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हंस हंस कर निपटाई सारी परेशानी
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर।
Updated Fri, 18 Nov 2016 10:30 PM IST
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natak
- फोटो : natak
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शांति विहार गली नं. 6 शहरी जीवन को दिखाती है और इसके साथ ही जीवन जीने के तरीके भी बताती है। यही कारण है कि शांति विहार गली नं. 6 के बारे में जानने के लिए लोग उत्सुक रहे।
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बैकुंठ नाट्य महोत्सव की चौथी संध्या पर आयोजित शांति विहार गली न. 6 नाटक के मंचन ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। बृहस्पतिवार देर शाम एनआईटी सभागार में नाटक का शुभारंभ गढ़वाल विवि के विशेष कार्याधिकारी प्रो. डीएस नेगी और अभिहित अधिकारी जिला खाद्य सुरक्षा विभाग प्रमोद रावत ने किया।
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इसके बाद दिल्ली की प्रज्ञा आर्ट्स संस्था की ओर से शहर की जिंदगी पर आधारित शांति विहार गली न.6 नाटक का मंचन किया गया। नाटक के पात्र किसी भी परेशानी को बंटी-बबली की तरह हंस-हंस कर निपट लेते हैं। कहानी में मोहल्ले की चक्कलसबाजी, मुहल्ले का प्यार, बोल्ड शब्दों और लड़ाई - झगड़े को चुटीले अंदाज में बया किया गया। नाटक के अंत को मनोरंजक ढंग से पेश किया गया।
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कहानी में पुलिस कमिश्नर की लड़की को एक युवक से प्यार हो जाता है। उसका पिता दोनों को गोली से मार देता है, क्योंकि वह भाग के शादी कर लेती है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब एक पात्र आकर कहता है कि हर नाटक का दुख भरा अंत होता है। इसके बाद अंतिम दृश्य को रिवर्स मोड़ में लाया जाता है। अब दृश्य ही कुछ और होता है। बेटी को शादी के जोड़े में देखकर उसका पिता कहता है कि अरे तुमने भाग के शादी क्यों की? मुझे बता देती, मैं करवा देता। इसके पश्चात दोनों को गले लगा लेता है। नाटक का निर्देशक और लेखन लक्ष्मी रावत का था।
सर्फ मौत को यकीं हैं यहां के अस्पताल पर...
ये मुकम्मल तमाचा है पहाड़ के गाल पर, सिर्फ मौत को यकीं हैं यहां के अस्पताल पर.. जैसी रचना से कवि जयकृष्ण पैन्यूली ने पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था व्यवस्थाओं पर जमकर तंज कसे।
बृहस्पतिवार देर रात बैकुंठ चतुर्दशी मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन की शुरुआत लखनऊ की कवियत्री नुजहत अंजुम ने वंदना से की। कीर्तिनगर के कवि जयकृष्ण पैन्यूली ने वर्तमान परिदृश्य पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हम भीड़ में रोज मिलते हैं पर दिल नहीं मिलते, जैसे पुलिस को लाश तो मिलती है लेकिन कातिल नहीं मिलते।
उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी तंज कसे। वहीं कवि डा. अतुल शर्मा ने नदियों पर बन रहे अंधादुध बांधों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पर्वत की चिट्ठी ले जाना तू सागर की ओर नदी तू बहते रहना, तुझे बेचने आए हैं ये सत्ता के चोर।
कवि अशोक चक्रधर ने कविता के माध्यम से वर्तमान परिस्थितियों पर जम कर व्यंग कसे। श्रीनगर के कवि नीरज नैथानी ने नदी में बन रहे बांधो पर कविता पाठ किया। हास्य कवि प्रताप फौजदार, योगेंद्र मुदगिल ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। कवि सम्मेतन का संचालन कवि कमलेश राजहंस ने किया।
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मुकेश डिमरी बने मिस्टर श्रीनगर
बैकुंठ चतुर्दशी मेले के तहत आयोजित प्रतियोगिता में मिस्टर श्रीनगर का खिताब मुकेश डिमरी के नाम रहा। प्रतियोगिता में क्षेत्र के 22 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया था।
बृहस्पतिवार देर शाम जीआईएंडटीआई मैदान में मिस्टर श्रीनगर प्रतियोगिता आयोजित की गई।
मेले में पहली बार आयोजित हो रही इस प्रतियोगिता के प्रति युवाओं में जबरदस्त उत्साह बना हुआ था। विभिन्न चरणों में हुई इस प्रतियोगिता में मिस्टर श्रीनगर का खिताब मुकेश डिमरी के नाम रहा। मुकेश डिमरी पेशे से शिक्षक हैं। जबकि प्रथम उपविजेता का खिताब साबिर अहमद के नाम रहा। प्रतियोगिता प्रभारी अनूप बहुगुणा ने विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए।