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आग को लेकर बढ़ने लगी चिंता
ब्यूरो/ अमर उजाला, पौड़ी
Updated Wed, 13 Apr 2016 10:19 PM IST
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फायर सीजन आते ही पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में आग की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंताएं बढ़ने लगी हैं। पहाड़ में ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं भी फायर स्टेशन नहीं हैं। यहां आग लगने पर उसे बुझाने के लिए पचास से सौ किलोमीटर दूर से दमकल वाहन जाते हैं। जब तक यह वाहन घटना स्थल पर तब पहुंचता तब तक आग की चपेट में आने से वहां सब कुछ जलकर राख हो जाता है।
गढ़वाल मंडल के पांच पर्वतीय जिलों में मात्र नौ फायर स्टेशन हैं। इनमें पौड़ी, टिहरी, चमोली और उत्तरकाशी में दो-दो और रुद्रप्रयाग में एक फायर स्टेशन हैं। ज्यादातर फायर स्टेशन जिला मुख्यालय और बड़े शहरों में स्थापित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बाजारों में कहीं भी फायर स्टेशन नहीं है। जबकि पौड़ी जिले के सतपुली, पैैठाणी, थलीसैण, पाबौ समेत कई ग्रामीण बाजार अब नगरीय क्षेत्र का रूप ले चुकी हैं।
प्रस्तावों को नहीं मिल रही मंजूरी
आग पर काबू पाने के लिए यहां नए फायर स्टेशन खोलने की मांग की जा रही है। पौड़ी जिले में अभी पौड़ी शहर और कोटद्वार में ही फायर स्टेशन हैं। श्रीनगर में वैकल्पिक तौर पर दमकल का एक वाहन रखा गया है। अन्य जगहों पर आग पर काबू पाने की व्यवस्था भगवान के भरोसे पर है। मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों में 16 नए फायर स्टेशन खोलने के प्रस्ताव भेजे गए हैं। इनमें पौड़ी और टिहरी के पांच-पांच, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी का एक-एक, चमोली जिले के चार प्रस्ताव शामिल हैं। प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक फायर गणेश चंद्र पंत कहते हैं विभाग की तरफ से इन्हें शासन भेजा गया है। शासन से अभी इन्हें मंजूरी नहीं मिल पाई है।
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नयार नदी है दोनों फायर स्टेशनों का बार्डर
पौड़ी जिले में स्थापित फायर स्टेशनों का बार्डर नयार नदी है। सतपुली में नयार नदी से पौड़ी की तरफ पड़ने वाला पूरा क्षेत्र फायर स्टेेशन पौड़ी के अधीन है। जबकि नयार नदी के दूसरी ओर पड़ने वाले जिले के अन्य ब्लाक कोटद्वार फायर स्टेशन के अधीन हैं। दोनों स्टेशनों के अधीन सौ किमी से अधिक का लंबा-चौड़ा क्षेत्र है। जिला अग्नि शमन अधिकारी प्रेम सिंह कहते हैं कि दूर के क्षेत्रों में आग की घटना होने पर फायर दल को समय पर घटनास्थल पर पहुंचना हमेशा मुश्किल बना रहता है।
फायर स्टेशन खोलने प्रस्ताव स्थल
पौड़ी : थलीसैण, धूमाकोट, सतपुली, श्रीनगर, लैसडौन।
टिहरी : घनसाली, थत्यूड़, लंबगांव, कीर्तिनगर, देवप्रयाग।
रुद्रप्रयाग : जखोली।
उत्तरकाशी : पुरोला।
चमोली: गैरसैण, कर्णप्रयाग, थराली, बदरीनाथ।
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गढ़वाल मंडल के पांच पर्वतीय जिलों में मात्र नौ फायर स्टेशन हैं। इनमें पौड़ी, टिहरी, चमोली और उत्तरकाशी में दो-दो और रुद्रप्रयाग में एक फायर स्टेशन हैं। ज्यादातर फायर स्टेशन जिला मुख्यालय और बड़े शहरों में स्थापित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की बाजारों में कहीं भी फायर स्टेशन नहीं है। जबकि पौड़ी जिले के सतपुली, पैैठाणी, थलीसैण, पाबौ समेत कई ग्रामीण बाजार अब नगरीय क्षेत्र का रूप ले चुकी हैं।
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प्रस्तावों को नहीं मिल रही मंजूरी
आग पर काबू पाने के लिए यहां नए फायर स्टेशन खोलने की मांग की जा रही है। पौड़ी जिले में अभी पौड़ी शहर और कोटद्वार में ही फायर स्टेशन हैं। श्रीनगर में वैकल्पिक तौर पर दमकल का एक वाहन रखा गया है। अन्य जगहों पर आग पर काबू पाने की व्यवस्था भगवान के भरोसे पर है। मंडल के पर्वतीय क्षेत्रों में 16 नए फायर स्टेशन खोलने के प्रस्ताव भेजे गए हैं। इनमें पौड़ी और टिहरी के पांच-पांच, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी का एक-एक, चमोली जिले के चार प्रस्ताव शामिल हैं। प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक फायर गणेश चंद्र पंत कहते हैं विभाग की तरफ से इन्हें शासन भेजा गया है। शासन से अभी इन्हें मंजूरी नहीं मिल पाई है।
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नयार नदी है दोनों फायर स्टेशनों का बार्डर
पौड़ी जिले में स्थापित फायर स्टेशनों का बार्डर नयार नदी है। सतपुली में नयार नदी से पौड़ी की तरफ पड़ने वाला पूरा क्षेत्र फायर स्टेेशन पौड़ी के अधीन है। जबकि नयार नदी के दूसरी ओर पड़ने वाले जिले के अन्य ब्लाक कोटद्वार फायर स्टेशन के अधीन हैं। दोनों स्टेशनों के अधीन सौ किमी से अधिक का लंबा-चौड़ा क्षेत्र है। जिला अग्नि शमन अधिकारी प्रेम सिंह कहते हैं कि दूर के क्षेत्रों में आग की घटना होने पर फायर दल को समय पर घटनास्थल पर पहुंचना हमेशा मुश्किल बना रहता है।
फायर स्टेशन खोलने प्रस्ताव स्थल
पौड़ी : थलीसैण, धूमाकोट, सतपुली, श्रीनगर, लैसडौन।
टिहरी : घनसाली, थत्यूड़, लंबगांव, कीर्तिनगर, देवप्रयाग।
रुद्रप्रयाग : जखोली।
उत्तरकाशी : पुरोला।
चमोली: गैरसैण, कर्णप्रयाग, थराली, बदरीनाथ।