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अल्मोड़ा से चला गढ़वाल राइफल्स का दल पहुंचा लैंसडौन
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गढ़वाल रेजीमेंट की गौरवशाली गाथा, 134 वर्षीय गौरवमयी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से रूबरू कराने, उससे प्रेरणा लेने और वर्तमान पीढ़ी को इन परंपराओं से जोड़ने के उद्देश्य से गढ़वाल राइफल्स के 30 अधिकारियों और जवानों का दल लैंसडौन पहुंचा। दल अल्मोड़ा से चला था। रेजीमेंटल मुख्यालय पहुंचने पर दल का गढ़वाल राइफल्स, गढ़वाल स्काउट्स ग्रुप के कर्नल ऑफ दि रेजिमेंट ले. जनरल सवनीत सिंह सहित सैन्य अधिकारियों ने स्वागत किया।
इसके बाद दल शहीद भवानी दत्त जोशी परेड ग्राउंड पहुंचा। जहां गढ़वाल राइफल्स व गढ़वाल स्काउट्स ग्रुप के कर्नल ऑफ दि रेजीमेंट ले. जनरल सवनीत सिंह, गढ़वाल ग्रुप व गढ़वाल स्काउट्स के कर्नल ऑफ दि रेजीमेंट रहे ब्रिगेडियर एआईएस ढिल्लन, गढ़वाल राइफल्स के कमांडेंट ब्रिगेडियर हरमीत सेठी ने दल का स्वागत किया। दल ने 13 सितंबर को गढ़वाल राइफल्स की पहली बटालियन की स्थापना के स्थान अल्मोड़ा के छावनी ऑफिसर्स मेस से पैदल मार्च शुरू किया था। दल का नेतृत्व ले. कर्नल अरुण थॉमस ने किया। दल के सेनानायक नायब सूबेदार अजय कुमार ने बताया कि कुमाऊं से गढ़वाल तक की पैदल यात्रा के दौरान दल ने जनता के साथ बीते संस्मरणों, अनुभवों को मंच से साझा किया। दल 18 दिनों में 325 किमी की दूरी तय कर लैंसडौंन पहुंचा। सेनानायक अजय कुमार ने बताया कि दल में एक सैन्य अधिकारी, दो जेसीओ और 27 जवान शामिल रहे।
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इसके बाद दल शहीद भवानी दत्त जोशी परेड ग्राउंड पहुंचा। जहां गढ़वाल राइफल्स व गढ़वाल स्काउट्स ग्रुप के कर्नल ऑफ दि रेजीमेंट ले. जनरल सवनीत सिंह, गढ़वाल ग्रुप व गढ़वाल स्काउट्स के कर्नल ऑफ दि रेजीमेंट रहे ब्रिगेडियर एआईएस ढिल्लन, गढ़वाल राइफल्स के कमांडेंट ब्रिगेडियर हरमीत सेठी ने दल का स्वागत किया। दल ने 13 सितंबर को गढ़वाल राइफल्स की पहली बटालियन की स्थापना के स्थान अल्मोड़ा के छावनी ऑफिसर्स मेस से पैदल मार्च शुरू किया था। दल का नेतृत्व ले. कर्नल अरुण थॉमस ने किया। दल के सेनानायक नायब सूबेदार अजय कुमार ने बताया कि कुमाऊं से गढ़वाल तक की पैदल यात्रा के दौरान दल ने जनता के साथ बीते संस्मरणों, अनुभवों को मंच से साझा किया। दल 18 दिनों में 325 किमी की दूरी तय कर लैंसडौंन पहुंचा। सेनानायक अजय कुमार ने बताया कि दल में एक सैन्य अधिकारी, दो जेसीओ और 27 जवान शामिल रहे।
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