{"_id":"e0b8819b188cca048bc5819504278689","slug":"garh-sanskriti-in-rose-festival-in-chandigarh-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोज फेस्टिवल में बिखरी गढ़ संस्कृति की खुशबू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोज फेस्टिवल में बिखरी गढ़ संस्कृति की खुशबू
कोटद्वार
Updated Mon, 22 Feb 2016 06:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पर्यटन विभाग चंडीगढ़ की ओर से और नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला के सहयोग से आयोजित रोज फैस्टिवल मेें कोटद्वार की आशु कला समिति की सुमित्रा रावत ग्रुप ने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर गढ़ संस्कृति की खुशबू बिखेरी।
रोज गार्डन चंडीगढ़ में 19 से 21 फरवरी तक आयोजित तीन दिवसीय रोज फेस्टिवल में सुमित्रा रावत ने गढ़वाली लोक गीतों और नृत्य से पंजाब और हरियाणा के लोगों को गढ़ संस्कृति से परिचय कराया। उन्होंने उत्तराखंड की पारंपरिक थड़िया, चौफला, धस्यारी, छोपती, झुमैलो, गंगाडो आदि नृत्यों की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोहा। सुमित्रा ने घसयारी नृत्य में घास काटी घसीलो मेरी भाना प्यारी.., छोपती में पोस्तु का छुआ मेरी भग्यानी ह्वेगे.., तांदी में सीता पांणी कु जांदी तौला गागरी लेकी.., गंगाड़ो में मेरा मन मां लागी छुम बोला रे.. आदि प्रस्तुतियों को दर्शकों ने हाथोंहाथ लिया और खूब तालियां बजाई। उनकी टीम में मुख्य रूप से गायक योगेंद्र गडोली, रूबी मंद्रवाल, संगीता नेगी, संजय सिंह नेगी, विजय कुमार, द्वारिका नौटियाल और रोशन रावत आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चंडीगढ़ से पहुंची आशुकला समिति की संस्थापक सुमित्रा रावत ने बताया कि उन्हें रोज फैस्टिवल में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। इससे वह गौरवान्वित है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रोज गार्डन चंडीगढ़ में 19 से 21 फरवरी तक आयोजित तीन दिवसीय रोज फेस्टिवल में सुमित्रा रावत ने गढ़वाली लोक गीतों और नृत्य से पंजाब और हरियाणा के लोगों को गढ़ संस्कृति से परिचय कराया। उन्होंने उत्तराखंड की पारंपरिक थड़िया, चौफला, धस्यारी, छोपती, झुमैलो, गंगाडो आदि नृत्यों की प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोहा। सुमित्रा ने घसयारी नृत्य में घास काटी घसीलो मेरी भाना प्यारी.., छोपती में पोस्तु का छुआ मेरी भग्यानी ह्वेगे.., तांदी में सीता पांणी कु जांदी तौला गागरी लेकी.., गंगाड़ो में मेरा मन मां लागी छुम बोला रे.. आदि प्रस्तुतियों को दर्शकों ने हाथोंहाथ लिया और खूब तालियां बजाई। उनकी टीम में मुख्य रूप से गायक योगेंद्र गडोली, रूबी मंद्रवाल, संगीता नेगी, संजय सिंह नेगी, विजय कुमार, द्वारिका नौटियाल और रोशन रावत आदि ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विज्ञापन
चंडीगढ़ से पहुंची आशुकला समिति की संस्थापक सुमित्रा रावत ने बताया कि उन्हें रोज फैस्टिवल में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। इससे वह गौरवान्वित है।
विज्ञापन