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टपकती छत के नीचे नौनिहाल बुन रहे हैं भविष्य के सपने

Sun, 14 Jul 2019 10:36 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jul 2019 10:36 PM IST
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Future dreams of  under roofs
यमकेश्वर ब्लाक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय कांडा की टपकती छत। - फोटो : KOTDWAR
कोटद्वार। शिक्षा विभाग के लापरवाहीपूर्ण कार्यप्रणाली के चलते पौड़ी जिले के 76 सरकारी विद्यालयों में हजारों नौनिहाल टपकती छत के नीचे भविष्य के सपने बुन रहे हैं। शिक्षा विभाग सरकारी विद्यालयों में प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधा संपन्न कराने की बात तो कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आलम यह है कि विभाग सुविधाएं जुटाना तो छोड़, बच्चों को सही सलामत छत भी मुहैया नहीं करा पा रहा है। जनपद पौड़ी के आठ ब्लाकों के बच्चे बरसात में टपकती छत के नीचे शिक्षा लेने को मजबूर हैं। विभाग के आला अधिकारी विद्यालयों की मरम्मत के लिए बजट की कमी बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
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पौड़ी जिले के दुगड्डा, जयहरीखाल, रिखणीखाल, एकेश्वर, द्वारीखाल, यमकेश्वर, नैनीडांडा और बीरोखाल ब्लाक में विभाग द्वारा वर्षों से प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की मरम्मत नहीं की गई है। कुछ विद्यालयों की मरम्मत भी हुई तो वह भी गुणवत्ता की कमी की भेंट चढ़ गए। विभागीय आंकड़ों पर नजर डालेें तो वर्तमान में इन सभी ब्लाकों के 76 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय बरसात में टपक रहे हैं। कक्षाओं में बरसाती पानी के टपकने से बच्चों का बैठना तक मुश्किल हो गया है। कई विद्यालयों में कमरों के टपकने से कक्षाएं बरामदे में संचालित हो रही हैं। बरामदे में तेज हवाओं के साथ होने वाली बारिश की फुआरों के बीच बच्चे किस प्रकार शिक्षा ले रहे होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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जनपद के विद्यालयों की स्थिति
ब्लाक टपकते विद्यालय
दुगड्डा 05
जयहरीखाल 05
रिखणीखाल 09
एकेश्वर 10
द्वारीखाल 17
नैनीडांडा 16
बीरोखाल 07
यमकेश्वर 07
क्या कहते हैं अधिकारी
बरसात में विद्यालयों की छत टपक रही है, जिसके कारण बच्चों और शिक्षकों को परेशानी हो रही है। कई बार शासन को विद्यालय के भवनों की मरम्मत के लिए बजट की मांग की गई है, लेकिन बजट के अभाव में विद्यालयों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। बजट आने पर ही विद्यालयों की मरम्मत कराई जाएगी।
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-मदन सिंह रावत, मुख्य शिक्षा अधिकारी पौड़ी
-फोटो
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