फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Kotdwar News ›   Canals and gullies are damaged in 73 villages of Municipal Corporation area, tenant farmers upset

नगर निगम क्षेत्र के 73 गांवों में क्षतिग्रस्त पड़ी हैं नहरें व गूलें, काश्तकार परेशान

Fri, 24 Jun 2022 09:12 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jun 2022 09:12 PM IST
विज्ञापन
Canals and gullies are damaged in 73 villages of Municipal Corporation area, tenant farmers upset
चार साल पहले वजूद में आया नगर निगम कोटद्वार भाबर के 73 गांवों के काश्तकारों के लिए मुसीबत बन गया है। निगम बनने के चार साल बाद भी क्षतिग्रस्त नहरों व गूलों की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग को एक धेला नहीं मिल सका है, जिस कारण काश्तकारों के समक्ष सिंचाई का संकट हो जाता है। काश्तकार धान की रोपाई के लिए मानसून के भरोसे हैं।
विज्ञापन

कोटद्वार भाबर के 73 गांव निगम में शामिल होने से पहले दुगड्डा ब्लाक के ग्रामीण अंचल में आते थे। तब नाबार्ड समेत कई योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्र की योजनाओं के लिए धनावंटन हो जाता था, लेकिन निगम बनने के बाद यह पूरा क्षेत्र शहरी विकास के अंतर्गत आ गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्र की योजनाएं यहां लागू नहीं होतीं। इसका सबसे बड़ा खामियाजा काश्तकारों को उठाना पड़ रहा है। शहरी क्षेत्र के अलावा भाबर के गांवों में आज भी खेती होती है। मालिनी किसान पंचायत और अखिल भारतीय किसान सभा के संरक्षक ज्ञान सिंह नेगी, मधुसूदन नेगी, जेपी बहुखंडी का कहना है कि निगम बनने के बाद से काश्तकार परेशान हैं। गांवों की सिंचाई नहरें व गूलें वर्ष 2017 व इसके बाद आई आपदाओं से ध्वस्त पड़ी हैं। थोड़ी बहुत सफाई और मरम्मत ग्रामीणों ने अपने स्तर पर कर कामचलाऊ व्यवस्था बनाने का प्रयास किया, लेकिन मुख्य नहरें जस की तस पड़ी हैं। मानसून सत्र शुरू हो चुका है। धान की रोपाई सिर पर है, लेकिन नहरों की हालत देखकर काश्तकार मायूस हैं। वे नगर निगम से लेकर विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री तक गुहार लगा चुके हैं। विधानसभा चुनाव से पहले की रैली में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काश्तकारों को आश्वासन दिया था कि नहरों और गूलों की मरम्मत व नवनिर्माण के लिए धनराशि आवंटित की जाएगी, लेकिन वह भी दूर की कौड़ी बनी हुई है।
विज्ञापन

काश्तकार बीरेंद्र प्रसाद, दाताराम केष्टवाल, गोविंद मेहरा, सुरेंद्र मेहरा, कुबेर जलाल का कहना है कि सिंचाई के अभाव में धान की रोपाई करना चुनौती बना हुआ है। सिंचाई विभाग से कई बार सिंचाई गूलों और नहरों की मरम्मत कराने की मांग की गई, लेकिन वह बजट का अभाव बताकर वे पल्ला झाड़ देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

झंडीचौड़ पश्चिमी के पार्षद सुखपाल शाह, त्रिलोकपुर के पार्षद राकेश बिष्ट, अमित नेगी और जगदीश मेहरा का कहना है कि किसान कर्ज लेकर फसलों की बुवाई करते हैं, लेकिन सिंचाई के अभाव में उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

नगर निगम के सभी 40 वार्डों में नहरों और सिंचाई गूलों की मरम्मत व निर्माण के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजे गए हैं। स्वीकृति मिलते ही धरातल पर काम शुरू कर दिया जाएगा। - विनोद कुमार, एसडीओ, सिंचाई खंड दुगड्डा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed