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चट्टान से गिरकर शिशु हाथी की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला कोटद्वार
Updated Fri, 06 Jan 2017 10:08 PM IST
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Baby elephant died
- फोटो : अमर उजाला
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लैंसडौन वन प्रभाग कोटद्वार रेंज के तहत कण्वाश्रम बीट के कंपार्टमेंट मालन नंबर दो में बाघ के हमले में चट्टान से गिरकर शिशु हाथी की मौत हो गई। वन विभाग ने शिशु हाथी का पोस्टमार्टम करवाकर शव दफना दिया है।
बृहस्पतिवार शाम को कण्वाश्रम से करीब पांच किलोमीटर भीतर जंगल में चारा-पत्ती लेने गई ग्रामीण महिलाओं ने जंगल में एक शिशु हाथी के शव को देखा। उन्होंने कण्वाश्रम पहुंचकर इसकी सूचना वनकर्मियों को दी।
हाथी के बच्चे की मौत की खबर सुनते ही वन विभाग की टीम उसी वक्त जंगल में हाथी के शव की तलाश में निकल गई। उन्होंने मौके पर पहुंच शव कब्जे में ले लिया। शुक्रवार को वन विभाग की टीम पशु चिकित्सक डा. मंजीत सिंह और डा. राजेश कुमार को लेकर दोपहर करीब एक बजे मौके पर पहुंचे और मृत हाथी का पोस्टमार्टम करवाकर शव दफना दिया।
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रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल ने बताया कि हाथी का बच्चा करीब ढाई वर्ष का था। शिशु हाथी के शरीर पर दांत और पंजों के निशान देखे गए हैं। जोकि बाघ के हमले के थे, बाघ के हमले में शिशु हाथी करीब चालीस फीट ऊंचे चट्टान से गिर गया और उसकी मौत हो गई। मौके पर उसके सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं।
लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के तहत लालपानी बीट में 26 दिसंबर सोमवार को एक पर एक शिशु हाथी की मौत हो गई थी। उस पर भी बाघ ने हमला किया था, और उसकी भी ऊंची चट्टान से गिरकर मौत हो गई थी। शिशु हाथी की मौत से आक्रोशित हाथियों ने वन कर्मियों को शव के करीब नहीं आने दिया, अगले दिन वन कर्मियों ने शव को दफनाया।
कोटद्वार के एसडीओ जीसी बेलवाल ने बताया कि शिशु हाथी करीब डेढ़ वर्ष का था। उसके पांव और शरीर की कई कोमल जगहों पर टाइगर ने वार किया था। पांव का मांस खाने के कारण शिशु हाथी चल नहीं पा रहा था, जिसके कारण वह ढांग से गिर गया और उसकी मौत हो गई थी।
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बृहस्पतिवार शाम को कण्वाश्रम से करीब पांच किलोमीटर भीतर जंगल में चारा-पत्ती लेने गई ग्रामीण महिलाओं ने जंगल में एक शिशु हाथी के शव को देखा। उन्होंने कण्वाश्रम पहुंचकर इसकी सूचना वनकर्मियों को दी।
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हाथी के बच्चे की मौत की खबर सुनते ही वन विभाग की टीम उसी वक्त जंगल में हाथी के शव की तलाश में निकल गई। उन्होंने मौके पर पहुंच शव कब्जे में ले लिया। शुक्रवार को वन विभाग की टीम पशु चिकित्सक डा. मंजीत सिंह और डा. राजेश कुमार को लेकर दोपहर करीब एक बजे मौके पर पहुंचे और मृत हाथी का पोस्टमार्टम करवाकर शव दफना दिया।
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रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल ने बताया कि हाथी का बच्चा करीब ढाई वर्ष का था। शिशु हाथी के शरीर पर दांत और पंजों के निशान देखे गए हैं। जोकि बाघ के हमले के थे, बाघ के हमले में शिशु हाथी करीब चालीस फीट ऊंचे चट्टान से गिर गया और उसकी मौत हो गई। मौके पर उसके सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं।
लैंसडौन वन प्रभाग के कोटद्वार रेंज के तहत लालपानी बीट में 26 दिसंबर सोमवार को एक पर एक शिशु हाथी की मौत हो गई थी। उस पर भी बाघ ने हमला किया था, और उसकी भी ऊंची चट्टान से गिरकर मौत हो गई थी। शिशु हाथी की मौत से आक्रोशित हाथियों ने वन कर्मियों को शव के करीब नहीं आने दिया, अगले दिन वन कर्मियों ने शव को दफनाया।
कोटद्वार के एसडीओ जीसी बेलवाल ने बताया कि शिशु हाथी करीब डेढ़ वर्ष का था। उसके पांव और शरीर की कई कोमल जगहों पर टाइगर ने वार किया था। पांव का मांस खाने के कारण शिशु हाथी चल नहीं पा रहा था, जिसके कारण वह ढांग से गिर गया और उसकी मौत हो गई थी।