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आठ दिन बाद भी पिंजरे में नहीं फंसा गुलदार, ग्रामीणों में दहशत
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रिखणीखाल ब्लॉक के अंगणी गांव में पिछले 25 जनवरी को पूर्व सैनिक को निवाला बनाने वाले गुलदार की मूवमेंट घटनास्थल और गांव के आसपास लगातार बनी हुई है। जिससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।
रिखणीखाल ब्लॉक के अंतर्गत अंगणी गांव निवासी अधिवक्ता जीतेंद्र चौहान ने बताया कि पिछले 25 जनवरी को गुलदार के हमले में पूर्व सैनिक प्रवीण सिंह की मौत के बाद से दहशत बनी हुई है। घटनास्थल और गांव के पास लगातार गुलदार की मूवमेंट बनी हुई है। शुक्रवार शाम को एक बार फिर गुलदार नुनेरा तोक में देखा गया था। लेकिन, बावजूद इसके अभी तक गुलदार पिंजरे में नहीं फंस पाया है। क्षेत्र में अंगणी गांव के अलावा घोटला, मनीगांव, खनेता, घेड़ी, मंजुली, सिनाला, उनेरी, मंज्याड़ी, अंदरसौं, पलीगांव, नयेडी आदि गांवों में भी दहशत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी लैंसडौंन को ज्ञापन भेजकर नरभक्षी गुलदार को जल्द पकड़ने या मार गिराने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन और वन विभाग की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दूसरी ओर, रविवार को गढ़वाल वन प्रभाग के पोखड़ा रेंज अधिकारी राखी जुयाल ने गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने वन कर्मियों से गुलदार के मूवमेंट के बारे में जानकारी ली और ग्रामीणों से संयम बनाए रखने की अपील की। कहा कि पटाखे फोड़ने या हो हल्ला मचाने से गुलदार पिंजरे में कैद नहीं हो पाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की ओर से गुलदार को नरभक्षी घोषित करने की मांग की गई है। उन्हें ग्रामीणों की ओर से प्रेषित ज्ञापन अभी नहीं मिला है। पत्र मिलते ही उच्चाधिकारियों से गुलदार को नरभक्षी घोषित करने और गांव में शिकारी दल को तैनात करने की संस्तुति की जाएगी।
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रिखणीखाल ब्लॉक के अंतर्गत अंगणी गांव निवासी अधिवक्ता जीतेंद्र चौहान ने बताया कि पिछले 25 जनवरी को गुलदार के हमले में पूर्व सैनिक प्रवीण सिंह की मौत के बाद से दहशत बनी हुई है। घटनास्थल और गांव के पास लगातार गुलदार की मूवमेंट बनी हुई है। शुक्रवार शाम को एक बार फिर गुलदार नुनेरा तोक में देखा गया था। लेकिन, बावजूद इसके अभी तक गुलदार पिंजरे में नहीं फंस पाया है। क्षेत्र में अंगणी गांव के अलावा घोटला, मनीगांव, खनेता, घेड़ी, मंजुली, सिनाला, उनेरी, मंज्याड़ी, अंदरसौं, पलीगांव, नयेडी आदि गांवों में भी दहशत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी लैंसडौंन को ज्ञापन भेजकर नरभक्षी गुलदार को जल्द पकड़ने या मार गिराने की मांग की थी, लेकिन प्रशासन और वन विभाग की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दूसरी ओर, रविवार को गढ़वाल वन प्रभाग के पोखड़ा रेंज अधिकारी राखी जुयाल ने गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया। उन्होंने वन कर्मियों से गुलदार के मूवमेंट के बारे में जानकारी ली और ग्रामीणों से संयम बनाए रखने की अपील की। कहा कि पटाखे फोड़ने या हो हल्ला मचाने से गुलदार पिंजरे में कैद नहीं हो पाएगा। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की ओर से गुलदार को नरभक्षी घोषित करने की मांग की गई है। उन्हें ग्रामीणों की ओर से प्रेषित ज्ञापन अभी नहीं मिला है। पत्र मिलते ही उच्चाधिकारियों से गुलदार को नरभक्षी घोषित करने और गांव में शिकारी दल को तैनात करने की संस्तुति की जाएगी।
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