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Kotdwar News: बेस अस्पताल में अब छह दिसंबर तक तैनात रहेंगे निश्चेतक, होंगे ऑपरेशन
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कोटद्वार। राजकीय बेस अस्पताल में एक बार फिर से अगले दो महीने तक निश्चेतक (एनेस्थीसिया) की अस्थायी व्यवस्था की गई है। इस बार वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान शोध संस्थान श्रीनगर के असिस्टेंट प्रोफेसर अस्पताल में ऑपरेशन के समय उपलब्ध होंगे।बेस अस्पताल के निश्चेतक डॉ. एसडी आर्य 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए थे। तब से अस्पताल में स्थायी निश्चेतक की तैनाती नहीं हो सकी है। जुलाई महीने में निश्चेतक नहीं मिलने से ऑपरेशन नहीं हो सके थे। स्वास्थ्य निदेशालय ने 10-10 दिन का रोस्टर बनाकर जनपद चमोली के पांच निश्चेतक की अस्थायी तैनाती एक अगस्त से 20 सितंबर तक की थी। जिससे ऑपरेशन संभव हो सके थे, लेकिन 21 सितंबर के बाद से अब तक फिर से निश्चेतक उपलब्ध नहीं होने से अस्पताल में ऑपरेशन ठप पड़े हैं।
ऑपरेशन के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। हालात यह हो गए थे कि पर्वतीय क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में गंभीर घायलों के भी ऑपरेशन नहीं हो पा रहे थे, जिससे उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा था।
बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजयेश भारद्वाज ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय ने इस बार वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान शोध संस्थान श्रीनगर से निश्चेतकों की वैकल्पिक व्यवस्था की है। जिसके अंतर्गत आठ से 17 अक्तूबर तक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित कुमार, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. मनीष ग्यारा, 18 से 27 अक्तूबर तक एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वंदना शर्मा, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. शिवानी, 28 से अक्तूबर से छह नवंबर तक एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सत्येंद्र यादव, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. आशीष राणा, सात से 16 नवंबर तक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वंदना गहरवाल, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. सपना राजपूत, 17 से 26 नवंबर तक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वरुण प्रसाद, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. प्रदीप कुमार एवं 27 नवंबर से छह दिसंबर तक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोनिका भंडारी, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. पल्लवी ऑपरेशन के समय निश्चेतक के रूप में उपलब्ध होंगे।
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बड़ी दुर्घटना के बाद जागा विभाग
तीन दिन पहले बरातियों का वाहन खाई में गिरने से तीन बरातियों की मौत हो गई थी। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा था। उस समय अस्पताल में मौजूद लैंसडौन विधायक महंत दिलीप रावत ने स्वयं आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव महसूस किया था। विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर बेस अस्पताल कोटद्वार में निश्चेतक की स्थायी नियुक्ति एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान की मांग की थी। आखिरकार निदेशालय को मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से निश्चेतक की अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी।
ऑपरेशन के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। हालात यह हो गए थे कि पर्वतीय क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में गंभीर घायलों के भी ऑपरेशन नहीं हो पा रहे थे, जिससे उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ रहा था।
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बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजयेश भारद्वाज ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशालय ने इस बार वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय आयुर्विज्ञान शोध संस्थान श्रीनगर से निश्चेतकों की वैकल्पिक व्यवस्था की है। जिसके अंतर्गत आठ से 17 अक्तूबर तक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहित कुमार, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. मनीष ग्यारा, 18 से 27 अक्तूबर तक एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वंदना शर्मा, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. शिवानी, 28 से अक्तूबर से छह नवंबर तक एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सत्येंद्र यादव, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. आशीष राणा, सात से 16 नवंबर तक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वंदना गहरवाल, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. सपना राजपूत, 17 से 26 नवंबर तक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. वरुण प्रसाद, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. प्रदीप कुमार एवं 27 नवंबर से छह दिसंबर तक असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोनिका भंडारी, रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. पल्लवी ऑपरेशन के समय निश्चेतक के रूप में उपलब्ध होंगे।
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तीन दिन पहले बरातियों का वाहन खाई में गिरने से तीन बरातियों की मौत हो गई थी। गंभीर रूप से घायल तीन लोगों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ा था। उस समय अस्पताल में मौजूद लैंसडौन विधायक महंत दिलीप रावत ने स्वयं आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव महसूस किया था। विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर बेस अस्पताल कोटद्वार में निश्चेतक की स्थायी नियुक्ति एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान की मांग की थी। आखिरकार निदेशालय को मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से निश्चेतक की अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ी।