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ठेकेदारों ने किया ई-टेंडरिंग व्यवस्था का विरोध
Updated Thu, 27 Jul 2017 10:22 PM IST
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लैंसडौन। पर्वतीय ठेकेदार संघ समिति की बैठक में ई-टेंडरिंग व्यवस्था का विरोध किया गया। कहा गया कि यह व्यवस्था छोटे ठेकेदारों के हितों के खिलाफ है। पर्वतीय क्षेत्रों में पूर्व की भांति टेंडरिंग व्यवस्था होनी चाहिए। बैठक में ठेकेदारों ने कई वर्षों से जमा 10 प्रतिशत राशि जल्द अवमुक्त करने की मांग की।
समिति के अध्यक्ष विनोद गौड़ की अध्यक्षता में लोनिवि परिसर में हुई बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री की ओर से पांच करोड़ तक के कार्य स्थानीय ठेकेदारों को दिए जाने पर सहमति दी गई थी, लेकिन बिना शासनादेश के मुख्यमंत्री की सहमति धरातल पर नहीं उतर पाई है। बैठक में राज्य की विषम परिस्थितियों को देखते हुए छोटे-छोटे जॉब बनाकर स्थानीय ठेकेदारों को देने की मांग की गई। कहा गया कि इससे जहां स्थानीय ठेकेदारों को रोजगार मिलेगा, वहीं कार्य की गुणवत्ता भी बढ़िया रहेगी। बैठक में समिति के उपाध्यक्ष जगमोहन नेगी, सचिव प्रदीप लखेड़ा, वीरेंद्र रावत, मनोज बिष्ट, हेमंत देवरानी, हरेंद्र बिष्ट, दिगंबर रावत, सुनील बौंठियाल व सुमन बिष्ट आदि ने विचार रखे।
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समिति के अध्यक्ष विनोद गौड़ की अध्यक्षता में लोनिवि परिसर में हुई बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री की ओर से पांच करोड़ तक के कार्य स्थानीय ठेकेदारों को दिए जाने पर सहमति दी गई थी, लेकिन बिना शासनादेश के मुख्यमंत्री की सहमति धरातल पर नहीं उतर पाई है। बैठक में राज्य की विषम परिस्थितियों को देखते हुए छोटे-छोटे जॉब बनाकर स्थानीय ठेकेदारों को देने की मांग की गई। कहा गया कि इससे जहां स्थानीय ठेकेदारों को रोजगार मिलेगा, वहीं कार्य की गुणवत्ता भी बढ़िया रहेगी। बैठक में समिति के उपाध्यक्ष जगमोहन नेगी, सचिव प्रदीप लखेड़ा, वीरेंद्र रावत, मनोज बिष्ट, हेमंत देवरानी, हरेंद्र बिष्ट, दिगंबर रावत, सुनील बौंठियाल व सुमन बिष्ट आदि ने विचार रखे।
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