नोटबंदी से कारोबार 50 फीसदी लुढ़का
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पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंदी के बाद से मंडल मुख्यालय पौड़ी के बैंकों में भले ही कतार अधिक नहीं लग रही है, लेकिन पांच सौ रुपये के नए नोट और सौ रुपये की नई करेंसी नहीं आने से रेस्तरांओं, होटलों में खाना खाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेस्तरां, होटल वाले पुराने पांच सौ के नोट नहीं ले रहे। छुट्टे नहीं होने से दो हजार रुपये का नोट भी काम नहीं दे रहा। इससे घरों से बाहर रहने वाले और होटलों पर निर्भर लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। होटलों/रेस्तरांओं का कारोबार भी नोटबंदी के बाद से उबर नहीं पा रहा है। कारोबारियों के अनुसार करीब 50 फीसदी व्यवसाय चौपट हो गया है।
मधुवन होटल के स्वामी सतींद्र सिंह नेगी ने बताया कि नोटबंदी से पहले उनका प्रतिदिन दस हजार रुपये का व्यवसाय था। अब प्रतिदिन तीन-चार हजार का व्यवसाय रह गया है। दो हजार के नोट को तुड़ाने के लिए छोटी करेंसी न होने से यह दिक्कत आ रही है।
माणिक रेस्टोरेंट के स्वामी राजेश कुकरेती कहते हैं कि वह नोटबंदी से खुश हैं। हालांकि उनके यहां भी करीब 40 फीसदी कारोबार मंदा हो गया है। पहले करीब 16 हजार प्रतिदिन व्यवसाय था, जो कि आजकल छह-सात हजार में सिमट गया है।
होटल फ्रंटियर के स्वामी महेश सचदेव कहते हैं कि नोटबंदी के अगले दिन नौ नवंबर से ही उन्होंने पुराने पांच सौ और एक हजार का नोट लेना बंद कर दिया था। उनकेे यहां करीब 35 प्रतिशत कारोबार मंदा हुआ है।
मिलन रेस्टोरेंट के स्वामी हेमेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि उनका 50 प्रतिशत कारोबार नोटबंदी से लुढ़क गया है। पहले उनका प्रतिदिन दस हजार का कारोबार था, अब पांच हजार में सिमट गया है। दीप रेस्टोरेंट के स्वामी नागेंद्र रतूड़ी कहते हैं कि नोटबंदी से उनके यहां करीब 50 फीसदी कारोबार चौपट हो गया है। शुभम होटल के स्वामी महिपाल सिंह पंवार, शिवम स्वीट्स के महिपाल सिंह, फैमिली रेस्टोरेंट के स्वामी गजेंद्र नेगी, रेस्टोरेंट का काम देख रहे दीपक नेगी व कोठारी होटल के स्वामी शैलेंद्र कोठारी कहते हैं कि उनके यहां नोटबंदी के बाद से छोटी करेंसी के अभाव में उनके यहां करीब 40 फीसदी कारोबार मंदा हो गया है।
स्वैप मशीन होने से हो रही सहूलियत
होटल उमेशा के स्वामी बुद्धिबल्लभ पंत कहते हैं कि उनके यहां स्वैप मशीन पहले से ही लगी थी, जिससे उपभोक्ताओं को सहूलियत हो रही है। अधिकतर लोग स्वैप मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद से उनका करीब 50 फीसदी कारोबार मंदा हो गया है।
उधार में खिलाकर बैलेंस किया
कलेक्ट्रेट के सामने स्थित इंदिरा अम्मा कैंटीन की अध्यक्ष सीमा देवी कहती हैं कि नोटबंदी के बाद पांच सौ और एक हजार का नोट तो उन्होंने लेना बंद कर दिया था, लेकिन बाहर के लोग जो कि यहां रहते हैं, उनमें से कई को उधार में भोजन कराया, जिससे उनके यहां अधिक कारोबार नहीं गिरा। उनके यहां प्रतिदिन डेढ़ से अधिक थाली की बिक्री हुई। इस तरह उन्होंने बैलेंस करके काम चलाया।