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.और जंगल से शिशु हाथी का परिवार आया और उसे साथ ले गया
Updated Sun, 06 Aug 2017 10:03 PM IST
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कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग की दुगड्डा रेंज के अंतर्गत खोह नदी में मां के साथ पानी पीने पहुंचा शिशु हाथी नदी के तेज बहाव में बह गया। वन कर्मियों ने दस घंटे तक रेस्क्यू कर बच्चे को सकुशल बाहर निकाला और उसकी मां से मिला दिया।
रविवार सुबह सात बजे आमसौड़ के पास गश्त के दौरान दुगड्डा रेंज के रेंजर किशोर नौटियाल को हाथी का बच्चा खोह नदी के किनारे पत्थर पर अटका हुआ तेज बहाव से जूझते हुए दिखा। उन्होंने तत्काल वन कर्मियों को मौके पर बुलाया और रेस्क्यू की तैयारी शुरू कर दी है।
रेंज अधिकारी नौटियाल ने बताया कि करीब दो महीने का शिशु हाथी खोह नदी के उस पार अपनी मां के साथ पानी पीने के लिए आया था। तभी वह तेज बहाव में बह गया और कुछ दूरी पर नदी के इस पार एक पत्थर पर अटक गया। वन कर्मियों ने रस्सों की मदद से किसी प्रकार शिशु हाथी को बाहर निकाला। इस दौरान उसकी स्वास्थ्य जांच कराई गई। शिशु हाथी स्वस्थ्य पाया गया। कुछ देर बाद उसकी मां नदी पार कर पहुंची और हाथी शिशु को उसने दूध पिलाया। इसके बाद वह उसे लेकर नदी पार करने लगी, लेकिन इस बार भी बच्चा बहने लगा। खतरे को भांपते हुए मां उसे नदी से वापस ले आई। शाम को पांच बजे जंगल से पांच हाथियों का झुंड आया और बच्चे को पांव के बीच में रखते हुए नदी पार कराकर अपने साथ जंगल में ले गया।
रविवार सुबह सात बजे आमसौड़ के पास गश्त के दौरान दुगड्डा रेंज के रेंजर किशोर नौटियाल को हाथी का बच्चा खोह नदी के किनारे पत्थर पर अटका हुआ तेज बहाव से जूझते हुए दिखा। उन्होंने तत्काल वन कर्मियों को मौके पर बुलाया और रेस्क्यू की तैयारी शुरू कर दी है।
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रेंज अधिकारी नौटियाल ने बताया कि करीब दो महीने का शिशु हाथी खोह नदी के उस पार अपनी मां के साथ पानी पीने के लिए आया था। तभी वह तेज बहाव में बह गया और कुछ दूरी पर नदी के इस पार एक पत्थर पर अटक गया। वन कर्मियों ने रस्सों की मदद से किसी प्रकार शिशु हाथी को बाहर निकाला। इस दौरान उसकी स्वास्थ्य जांच कराई गई। शिशु हाथी स्वस्थ्य पाया गया। कुछ देर बाद उसकी मां नदी पार कर पहुंची और हाथी शिशु को उसने दूध पिलाया। इसके बाद वह उसे लेकर नदी पार करने लगी, लेकिन इस बार भी बच्चा बहने लगा। खतरे को भांपते हुए मां उसे नदी से वापस ले आई। शाम को पांच बजे जंगल से पांच हाथियों का झुंड आया और बच्चे को पांव के बीच में रखते हुए नदी पार कराकर अपने साथ जंगल में ले गया।
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