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मलबा और जलभराव के भय से छतों पर रात गुजार रहे कौड़िया के ग्रामीण
Updated Fri, 31 Aug 2018 10:49 PM IST
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कोटद्वार। पनियाली गदेरे से सटे इलाकों में गत 25 अगस्त की आपदा के बाद से लोगों में जलभराव और मलबा आने का इतना भय बना हुआ है कि वे रातें छतों पर गुजार रहे हैं। दर्जनों घरों और दुकानों में अब भी प्रभावित लोग और व्यापारी मलबे की सफाई में जुटे हैं। नगर निगम और प्रशासन भले ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी नागरिक सुविधाएं बहाल होने का दावा कर रहा हो, लेकिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की हकीकत इससे अलग है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कौड़िया में दर्जनों दुकानों और घरों में बाढ़ का मलबा और पानी घुस गया था। यहां लोगों की जिंदगी अभी तक पटरी पर नहीं आ सकी है। ग्रामीण रामेश्वरी देवी और रामकुमार का कहना है कि सड़क और गलियों में थोड़ी बहुत सफाई नगर निगम की ओर से कर दी गई है, लेकिन घरों और दुकानों के मलबे की ओर नगर निगम ने मुंह मोड़ लिया है। उनका कहना है कि पिछले साल भी यहां भारी मलबा आया था, लेकिन इस साल यदि पनियाली नाले का ट्रीटमेंट सही ढंग से कर दिया जाता तो उन्हें यह परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। प्रशासन की ओर से उनकी कोई मदद नहीं की जा रही है। उलटे बारिश होने पर लोगों में इतना डर बैठ गया है कि घरों में मलबा और पानी घुसने के डर से वे छतों पर ही प्लास्टिक डालकर सोने में भलाई समझ रहे हैं।
कौड़िया की तरह देवीरोड का भी यही हाल है। यहां पनियाली गदेरे से सटी कई दुकानों में भारी मलबा घुुसा है। इसे दुकान स्वामी स्वयं ही साफ कर रहे हैं। दुकानदार इस मलबे को वहां से निकालकर सड़क पर डाल रहे हैं, जिससे वहां से आवाजाही करने वाले दोपहिया वाहन स्लिप होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। अब तक कई चोटिल लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं। राहगीरों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है।
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नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त राजेश नैथानी का कहना है कि सड़कों पर पड़े मलबे की सफाई की जा रही है। कई स्थानों पर मलबे की सफाई की जा चुकी है।
-फोटो
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्र कौड़िया में दर्जनों दुकानों और घरों में बाढ़ का मलबा और पानी घुस गया था। यहां लोगों की जिंदगी अभी तक पटरी पर नहीं आ सकी है। ग्रामीण रामेश्वरी देवी और रामकुमार का कहना है कि सड़क और गलियों में थोड़ी बहुत सफाई नगर निगम की ओर से कर दी गई है, लेकिन घरों और दुकानों के मलबे की ओर नगर निगम ने मुंह मोड़ लिया है। उनका कहना है कि पिछले साल भी यहां भारी मलबा आया था, लेकिन इस साल यदि पनियाली नाले का ट्रीटमेंट सही ढंग से कर दिया जाता तो उन्हें यह परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। प्रशासन की ओर से उनकी कोई मदद नहीं की जा रही है। उलटे बारिश होने पर लोगों में इतना डर बैठ गया है कि घरों में मलबा और पानी घुसने के डर से वे छतों पर ही प्लास्टिक डालकर सोने में भलाई समझ रहे हैं।
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कौड़िया की तरह देवीरोड का भी यही हाल है। यहां पनियाली गदेरे से सटी कई दुकानों में भारी मलबा घुुसा है। इसे दुकान स्वामी स्वयं ही साफ कर रहे हैं। दुकानदार इस मलबे को वहां से निकालकर सड़क पर डाल रहे हैं, जिससे वहां से आवाजाही करने वाले दोपहिया वाहन स्लिप होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। अब तक कई चोटिल लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं। राहगीरों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है।
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नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त राजेश नैथानी का कहना है कि सड़कों पर पड़े मलबे की सफाई की जा रही है। कई स्थानों पर मलबे की सफाई की जा चुकी है।
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