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सांसदों ने कैंट एरिया से नागरिक क्षेत्र को हटाने का दिया सुझाव-compat
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लैंसडौन। देश की 62 छावनी परिषदों के लिए बने छावनी अधिनियम में सुधार के लिए बनी विशेषज्ञ कमेटी की बैठक में सांसदों ने नागरिक क्षेत्र को छावनी परिषद के दायरे से बाहर कर इन क्षेत्रों को नगर निकाय बनाने की पुरजोर वकालत की। बैठक में राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया।
सांसद टम्टा ने बताया कि लैंसडौन समेत देश की 62 छावनी परिषदों (कैंट बोर्ड) को नगर पंचायत या नगर पालिका का दर्जा देने के लिए बीते शनिवार को दिल्ली में बैठक का आयोजन किया गया। इसमें संबंधित छावनी परिषदों से संबंधित 20 सांसदों ने कैंट एरिया से नागरिक क्षेत्र को हटाकर पृथक निकाय बनाने का सुझाव दिया। सभी सांसदों ने इस मामले के लिए गठित रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुमित बोस की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ कमेटी के समक्ष अपनी बात रखी।
सांसद टम्टा ने बताया कि बैठक में यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल के सांसदों ने अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखी। उन्होंने कहा कि छावनी अधिनियमों के कारण कैंट बोर्डों का विकास ठप पड़ गया है। सेना ने छावनियों को अपना बजट देने से साफ तौर पर मना कर दिया है। नागरिक क्षेत्रों को छावनी से अलग करने पर ही इन क्षेत्रों का विकास संभव है। जनता पर भारी भरकम टैक्स थोप कर छावनी परिषद चल रही हैं। उन्होंने बताया कि समिति 20 जनवरी को अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय के सौंपेगी। बैठक में बरेली के सांसद और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल, फिरोजपुर के सांसद शेर सिंह समेत देशभर से 20 सांसद मौजूद थे।
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सांसद टम्टा ने बताया कि लैंसडौन समेत देश की 62 छावनी परिषदों (कैंट बोर्ड) को नगर पंचायत या नगर पालिका का दर्जा देने के लिए बीते शनिवार को दिल्ली में बैठक का आयोजन किया गया। इसमें संबंधित छावनी परिषदों से संबंधित 20 सांसदों ने कैंट एरिया से नागरिक क्षेत्र को हटाकर पृथक निकाय बनाने का सुझाव दिया। सभी सांसदों ने इस मामले के लिए गठित रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुमित बोस की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ कमेटी के समक्ष अपनी बात रखी।
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सांसद टम्टा ने बताया कि बैठक में यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल के सांसदों ने अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखी। उन्होंने कहा कि छावनी अधिनियमों के कारण कैंट बोर्डों का विकास ठप पड़ गया है। सेना ने छावनियों को अपना बजट देने से साफ तौर पर मना कर दिया है। नागरिक क्षेत्रों को छावनी से अलग करने पर ही इन क्षेत्रों का विकास संभव है। जनता पर भारी भरकम टैक्स थोप कर छावनी परिषद चल रही हैं। उन्होंने बताया कि समिति 20 जनवरी को अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय के सौंपेगी। बैठक में बरेली के सांसद और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल, फिरोजपुर के सांसद शेर सिंह समेत देशभर से 20 सांसद मौजूद थे।
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