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द्वारीखाल ब्लाक के एनएसजी कमांडो रोशन ने एवरेस्ट पर फहराया तिरंगा
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कोटद्वार। पौड़ी जिले के द्वारीखाल ब्लॉक के सिमल्या गांव निवासी एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो रोशन सिंह ने देश और विदेश की कई दुर्गम पहाड़ियों पर चढ़ने के बाद अब माउंट एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहराकर अपनी रेजीमेंट, देश और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
एक अप्रैल 2019 को एवरेस्ट के लिए एनएसजी की 16 सदस्यीय टीम दिल्ली से नेपाल के लिए रवाना हुई थी। टीम के सदस्यों में से एक रोशन सिंह ने चार अप्रैल को माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की और 16 अप्रैल 2019 को एवरेस्ट की चोटी पर झंडा लहराकर अभियान संपन्न किया। दो जून को अपनी कंपनी में पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
रोशन सिंह के छोटे भाई बीरबल सिंह रावत ने बताया कि बचपन से ही रोशन की रुचि साहसिक खेलों में रहती थी। 17 वर्ष की आयु में वह गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हो गए। उनकी एडवेंचर में रुचि को देखते हुए वर्ष 2000 में गढ़वाल राइफल्स ने रोशन को जम्मू कश्मीर स्थित वारफयर स्कूल (हावस) से माउंटेन और विंटर कोर्स कराया। तब से आज तक रोशन ने रेजीमेंट की ओर से भारत के माउंट त्रिशूल, भागीरथी-2, सतोक कांगड़ी, मचोई, देव टिब्बा, जोगिन के अलावा विदेशों में कई पर्वतों पर सफलता पूर्वक गढ़वाल राइफल्स का परचम लहराया। एनएसजी में चयन होने के बाद वह टीम के साथ माउंट एवरेस्ट को फतह करने के लिए निकले थे। जिसे उन्होंने 16 अप्रैल को 8848 मीटर ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के बाद बेस कैंप आने पर पर उन्हें यह सूचना दी।
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एक अप्रैल 2019 को एवरेस्ट के लिए एनएसजी की 16 सदस्यीय टीम दिल्ली से नेपाल के लिए रवाना हुई थी। टीम के सदस्यों में से एक रोशन सिंह ने चार अप्रैल को माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की और 16 अप्रैल 2019 को एवरेस्ट की चोटी पर झंडा लहराकर अभियान संपन्न किया। दो जून को अपनी कंपनी में पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।
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रोशन सिंह के छोटे भाई बीरबल सिंह रावत ने बताया कि बचपन से ही रोशन की रुचि साहसिक खेलों में रहती थी। 17 वर्ष की आयु में वह गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हो गए। उनकी एडवेंचर में रुचि को देखते हुए वर्ष 2000 में गढ़वाल राइफल्स ने रोशन को जम्मू कश्मीर स्थित वारफयर स्कूल (हावस) से माउंटेन और विंटर कोर्स कराया। तब से आज तक रोशन ने रेजीमेंट की ओर से भारत के माउंट त्रिशूल, भागीरथी-2, सतोक कांगड़ी, मचोई, देव टिब्बा, जोगिन के अलावा विदेशों में कई पर्वतों पर सफलता पूर्वक गढ़वाल राइफल्स का परचम लहराया। एनएसजी में चयन होने के बाद वह टीम के साथ माउंट एवरेस्ट को फतह करने के लिए निकले थे। जिसे उन्होंने 16 अप्रैल को 8848 मीटर ऊंचाई पर स्थित एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के बाद बेस कैंप आने पर पर उन्हें यह सूचना दी।
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