{"_id":"e7cff217de06dc29dcd87f3d5f344ed4","slug":"kedarghati-big-problem-is-unemployment","type":"story","status":"publish","title_hn":"केदार घाटीः अब इस संकट ने उड़ाई रातों की नींद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केदार घाटीः अब इस संकट ने उड़ाई रातों की नींद
सुधाकर भट्ट/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 11 Oct 2013 08:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केदार घाटी में आई आपदा के बाद अब प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। यात्रा से जुड़े कई लोगों के सामने रोजगार का संकट है।
विज्ञापन
कोई कार्ययोजना नहीं
वहीं संबंधित विभागों के पास इस सवाल को हल करने की कोई कार्ययोजना फिलहाल नहीं है। रोजगार के लिए प्रदेश सरकार की निगाह या तो उभरते हुए पर्यटन क्षेत्र पर रही है या फिर तेजी से होने वाले औद्योगिकीकरण पर।
विज्ञापन
आपदा ने इन दोनों ही सेक्टर को खासा नुकसान पहुंचाया है। पीएचडी चैंबर के सर्वे के मुताबिक अकेले पर्यटन क्षेत्र को इस आपदा से करीब 12 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
चार धाम यात्रा से जुडे़ होटल व्यवसायियों, लॉज मालिकों के साथ ही अन्य कई लोग आर्थिक संकट झेल रहे हैं। दूसरी ओर कई उद्योग भी नुकसान की चपेट में आए हैं।
बेरोजगारी बड़ी समस्या
ऐसे में आपदा प्रभावित चमोली, रुद्रप्रयाग जिले में बेरोजगारी बड़ी समस्या बन गई है। इसके उलट रोजगार मुहैया कराने की फिलहाल कोई कोशिश होती नहीं दिख रही है।
इसकी न तो कोई कार्ययोजना ही सामने आई है और न इस विषय पर कोई खास बात अब तक सरकार ने की है। विशेषज्ञों के मुताबिक रोजगार के सवाल को बाजार के भरोसे छोड़ दिया गया है।
चारधाम यात्रा पटरी पर आ जाती है तो पर्यटन पटरी पर आ पाएगा और रोजगार के नए अवसर लोगों को मिल सकेंगे, पर यात्रा के भी पटरी में आने में कम से कम दो साल लगने तय हैं।
परिषद भी खामोश
विभिन्न सरकारी रोजगारपरक योजनाओं की निगरानी, मूल्यांकन, सुझाव, शिकायत निवारण आदि का काम करने वाली रोजगार परिषद भी ठंडे बस्ते में है। हाल यह है कि परिषद की स्थापना वर्ष 2007 में हो गई थी।
तब से वर्ष 2012 तक परिषद की सिर्फ दो बार बैठक हुई। यह तब था जबकि परिषद को विधानसभा के लिए भी हर साल रिपोर्ट तैयार करनी होती है। हैरत की बात यह है कि आपदा के बाद भी रोजगार परिषद अब तक खामोश है।
राज्य रोजगार गारंटी निधि तो बनी ही नहीं
जनवरी 2007 में रोजगार गारंटी निधि को स्थापित करने के लिए अधिसूचना जारी की गई थी। तबसे अब तक इसकी स्थापना नहीं हो पाई है। यह निधि होती तो सरकार के पास रोजगार की नई योजनाएं शुरू करने के लिए फंड होता।
फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें...