{"_id":"aef748aa-e4ca-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"if-the-tooth-identified-now","type":"story","status":"publish","title_hn":"केदारनाथः क्योंकि दांत ही अब पहचान हैं...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केदारनाथः क्योंकि दांत ही अब पहचान हैं...
रजा शास्त्री
Updated Thu, 04 Jul 2013 10:26 PM IST
विज्ञापन
उत्तराखंड की केदारघाटी में आई जल प्रलय में मारे गए लोगों की पहचान अब उनके दांत से ही होगी। डीएनए सैंपल में वैसे तो दांत के साथ बाल और मांस भी लिया गया है। लेकिन सबसे अधिक समय तक सुरक्षित रहने वाला शरीर का अंग दांत ही है। इसके अंदर कोशिकाएं बहुत सालों तक डीएनए टेस्टिंग के लायक बनी रहती हैं।
विज्ञापन
जौलीग्रांट मेडिकल कालेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डा. संजय दास ने बताया कि केदारघाटी में 18 शवों से डीएनए सैंपल लिए गए थे। उन्होंने बताया कि केदारबाबा के मंदिर के पास से किसी तरह खींच कर 18 शव निकाले गए, फिर इनका डीएनए सैंपल लिया गया।
विज्ञापन
डीएनए के लिए वैसे तो सबसे सुरक्षित दांत है। कभी-कभी दांत की कैनाल किसी वजह से बंद होती हैं। इसी कैनाल में कोशिकाएं होती हैं। इस तरह की स्थिति से बचने के लिए एहतियात के तौर पर बाल और मांस सुरक्षित कर लिया जाता है।
विज्ञापन
बाल की जड़ के मांस में कोशिकाएं होती हैं। अक्सर शव से बाल लेने पर जड़ नहीं होती। मांस जल्दी खराब हो जाता है जिससे इसकी कोशिकाएं डीएनए टेस्ट के काबिल नहीं रहतीं।