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मुसलमान के घर से विदा हुई हिंदू दुल्हन
अमर उजाला, अनिल चमोली, रुड़की
Updated Thu, 12 Sep 2013 01:02 AM IST
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धर्म के नाम पर एक दूसरे के दुश्मन बने लोगों के लिए रुड़की के एक मुस्लिम परिवार ने मानव प्रेम की एक मिशाल कायम की थी।
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रेलवे स्टेशन पर मिली पंद्रह साल की पायल को न सिर्फ चार साल तक पाला पोसा बल्कि बाद में उसकी शादी भी करवाई।
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अनाथ थी पायल
शादी के बाद भी पायल आज भी शानू रसूल के घर अपने मायके की तरह आती है और उसी तरीके से विदा भी किया जाता है।
जानकारी के अनुसार झारखंड की पायल अनाथ थी। उसके परिचितों ने उसे छोटी उम्र में जम्मू कश्मीर किसी हाथ बेच दिया। वहां जुल्मों का शिकार हुई भाग निकली और रुड़की रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई।
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लकड़ी का मंदिर भी बनाया
लावारिस हालत में मिली पायल को शेखपुरी निवासी शानू रसूल के परिवार ने गोद ले लिया। मुस्लिम परिवार ने उसे घर में एक कमरा दे दिया और हिंदू रिति रिवाज से रहने की इजाजत भी।
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उसके कमरे में पूजा पाठ करने के लिए एक लकड़ी का मंदिर भी बनाया गया। मुस्लिम परिवार के साथ रहने के बाद भी उसने अपने आप को अकेला नहीं समझा।
हिंदू वर की तलाश
दो साल पहले 19 साल की होने पर शानू रसूल के परिवार ने उसके लिए हिंदू वर की तलाश की। वर की तलाश पूरे होने पर हिंदू रिति रिवाज से उसकी शादी कर दी। अब पायल का एक बेटा भी है।
ससुराल मुज्जफनगर के सिसौली गांव में है। पायल अब भी शानू रसूल के घर आती-जाती है। रसूल परिवार भी उसके साथा मायके वालों की तरह पेश आते हैं। उसे अपनी बेटी तरह हर बार ससुराल के लिए कुछ उपहार देकर विदा किया जाता है।
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इनकी भी सुनिए
पायल का बेटे होने के पहली बार घर आई तो दोनों को कपड़े और कुछ जरूरी सामान देकर विदा किया। हमारे त्योहार पर वह अभी हमारे घर पहुंचती है। हिंदू के त्योहार के मौके पर हम भी उसे बधाई देने के साथ जरूरी उपहार देते हैं। वह अभी हमारे परिवार की सदस्य और हमने कभी उसे यह अहसास नहीं होने दिया कि वह मुस्लिम घर में रहती है।
- शानू रसूल