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आर्थिकी का आधार बन सकती है वेस्ट सामग्री
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एसएमजेएन पीजी कॉलेज में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और साहस संस्था के संयुक्त तत्वाधान में ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन’ विषय पर सेमिनार में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने टीम अविरल की ओर से प्लास्टिक के प्रबंधन की पहल सराहना की। कहा कि संस्था बढ़-चढ़कर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में भूमिका निभा रही है।
शुक्रवार को आयोजित सेमिनार में उन्होंने कहा कि गंगा हमारी सांस्कृतिक, आर्थिक एवं धार्मिक पहचान है। उसे स्वच्छ और निर्मल करने के लिए अविरल प्रोजेक्ट जैसे कार्यक्रम अत्यंत लाभप्रद हैं। डॉ. बत्रा ने छात्र-छात्राओं से सिंगल यूज प्लास्टिक को कम से कम उपयोग करने आह्वान किया। वेस्ट सामग्री प्रबंधन वर्तमान में सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसे इसको आर्थिकी विकास का भी आधार बनाया जा सकता है।
प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए विशाल जायसवाल ने कहा कि छात्र-छात्राएं चाहें तो अविरल प्रोजेक्ट से जुड़ सकते हैं। इससे न केवल उन्हें वित्तीय लाभ होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी पूरा होगा। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय कुमार माहेश्वरी ने कहा कि अविरल प्रोजेक्ट की ओर से गीला व सूखा कचरा के संबंध में बनाई गई जो जागरूकता उत्पन्न की गई है। वह सराहनीय है। विनय थपलियाल ने कहा कि इंग्लैंड का उदाहरण सामने हैं, जिन्होंने अपने यहां पर्यावरण संरक्षण को सांस्कृतिक आयामों से जोड़ते हुए सफलता अर्जित की है। इस मौके पर डॉ. विजय शर्मा, सात्विक, डॉ. निविंधया शर्मा, डॉ. पदमावती तनेजा, डॉ. अमिता मल्होत्रा, डॉ. प्रज्ञा जोशी, नेहा गुप्ता, रिकंल गोयल, डॉ. लता शर्मा, रिचा मिनोचा, विनीत सक्सेना, प्रिंस श्रोत्रिय, महिमा व प्रिंयका मौजूद रहे।
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शुक्रवार को आयोजित सेमिनार में उन्होंने कहा कि गंगा हमारी सांस्कृतिक, आर्थिक एवं धार्मिक पहचान है। उसे स्वच्छ और निर्मल करने के लिए अविरल प्रोजेक्ट जैसे कार्यक्रम अत्यंत लाभप्रद हैं। डॉ. बत्रा ने छात्र-छात्राओं से सिंगल यूज प्लास्टिक को कम से कम उपयोग करने आह्वान किया। वेस्ट सामग्री प्रबंधन वर्तमान में सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसे इसको आर्थिकी विकास का भी आधार बनाया जा सकता है।
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प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए विशाल जायसवाल ने कहा कि छात्र-छात्राएं चाहें तो अविरल प्रोजेक्ट से जुड़ सकते हैं। इससे न केवल उन्हें वित्तीय लाभ होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी पूरा होगा। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय कुमार माहेश्वरी ने कहा कि अविरल प्रोजेक्ट की ओर से गीला व सूखा कचरा के संबंध में बनाई गई जो जागरूकता उत्पन्न की गई है। वह सराहनीय है। विनय थपलियाल ने कहा कि इंग्लैंड का उदाहरण सामने हैं, जिन्होंने अपने यहां पर्यावरण संरक्षण को सांस्कृतिक आयामों से जोड़ते हुए सफलता अर्जित की है। इस मौके पर डॉ. विजय शर्मा, सात्विक, डॉ. निविंधया शर्मा, डॉ. पदमावती तनेजा, डॉ. अमिता मल्होत्रा, डॉ. प्रज्ञा जोशी, नेहा गुप्ता, रिकंल गोयल, डॉ. लता शर्मा, रिचा मिनोचा, विनीत सक्सेना, प्रिंस श्रोत्रिय, महिमा व प्रिंयका मौजूद रहे।
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