विज्ञापन

मान्यताओं की यात्रा है कांवड़

ब्यूरो/अमर उजाला हरिद्वार Updated Sun, 24 Jul 2016 11:37 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
हरिद्वार। उत्तर भारत की सबसे बड़ी अध्यात्मिक यात्रा मानी जाने वाली कांवड़ मन्नतों और मान्यताओं की भी यात्रा है। सावन मास में होने वाली इस यात्रा में कोई नौकरी के लिए भगवान भोले शंकर को मनाने का प्रयास करता है तो किसी को अपने बेटे के लिए अच्छी एवं संस्कारी बहू चाहिए।
विज्ञापन

हरिद्वार में इस समय गेरुआ रंग के कच्छा-बनियानधारी कांवड़ियों का समागम है। यह भारी तादाद उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सो के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों से धर्मनगरी में कांवड़ भरने आती है। इस समय दिल्ली, हरियाणा और आसपास के शिवभक्तों की भीड़ उमड़ी हुई है। कांवड़ चढ़ाकर भगवान भोले को मनाने के लिए लोग लोक कल्याण की भावना तो रखते ही हैं अपने लिए भी बेहतर हो इसकी भी मान्यता मन में रहती है।
रोहतक से कांवड़ लेने पहुंची बुजुर्ग महिला रोशनी देवी के ने बताया कि उसके दो बेटे ब्याह लायक हो गए हैं। अभी तक परिवार संयुक्त है। घरवाले चाहते हैं कि आगे भी बंटवारा न हो। लेकिन बहू तेज तर्रार आई तो ऐसा हो नहीं सकेगा। रोशनी देवी ने बताया कि बेटे को अच्छी संस्कारी बहू मिले इसलिए वह कांवड़ चढ़ाने आई है। नोएडा से आए राजीव कुमार साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उन्हें अच्छी नौकरी की तलाश है इसलिए भगवान भोले भंडारी की शरण में आए हैं। बाईपास, गाजियाबाद निवासी रामेश्चर चौधरी पोता होने की मन्नत मांगने के लिए कांवड़ चढ़ाने आए हैं। जबकि मामराज सिंह बेटे की नौकरी के लिए कांवड़ चढ़ाने हरिद्वार आए हैं। मनतों और मान्यताओं का यह रैला कांवड़ियों के रूप में अनवरत चल आ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us