{"_id":"621a58d8d0db1d252f10cda1","slug":"use-nano-urea-for-more-production-haridwar-news-drn405091530","type":"story","status":"publish","title_hn":"कम लागत में अधिक उत्पादन को नैनो यूरिया पर जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कम लागत में अधिक उत्पादन को नैनो यूरिया पर जोर
विज्ञापन
इफको की ओर से आयोजित मंडलीय सहकारी सम्मेलन में किसानों को स्प्रे मशीन देते अधिकारी ।
- फोटो : HARIDWAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इफ्को की ओर से गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के मीटिंग हॉल में मंडलीय सहकारी सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को कम लागत में फसलों के अधिक उत्पादन के लिए नैनो यूरिया के प्रयोग पर जोर दिया गया।
गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त हंसादत्त पांडेय ने किसानों के लिए सभी प्रकार के उर्वरकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया जनपद की सभी गन्ना समितियों में किसानों के प्रयोग के लिए उपलब्ध करा दिया है। नैनो यूरिया के प्रयोग से गन्ना का उत्पादन कम लागत में अधिक लिया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि गन्ने की प्रजाति सीओ 0238 अधिक उत्पादन देने वाली प्रजाति है। इसमें कीट प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना होता है। उन्होंने मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए जैविक उत्पादों जैसे गोबर की सड़ी खाद, कंपोस्ट, जैव उर्वरक, सागरिका आदि के प्रयोग करने की सलाह दी। इफ्को एमसी के प्रतिनिधि अंकुश चौधरी ने गन्ने में लगने वाले कीट एवं बीमारियों की रोकथाम के बारे में जानकारी दी। इफ्को के राज्य विपणन प्रबंधक राकेश कुमार श्रीवास्तव नए उत्पाद नैनो यूरिया के प्रयोग करने के तरीके एवं उसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया।
सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह ने कहा कि नैनो यूरिया पारंपरिक यूरिया से सस्ता है और इसके परिवहन में कुछ भी खर्च नहीं है। पारंपरिक दानेदार यूरिया की फसल की ओर से उपयोग क्षमता मात्र 30 से 40 प्रतिशत है। जबकि नैनो यूरिया की उपयोग क्षमता 80 से 90 प्रतिशत है। भविष्य में नैनो तकनीक पर आधारित अन्य आवश्यक उर्वरकों की आपूर्ति होनी चाहिए। इस मौके पर इफको के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक हरिद्वार डॉ. राम भजन सिंह, सहायक गन्ना आयुक्त देहरादून हिमानी पाठक, सुशील राठी, पवन ढींगरा, ओमवीर सिंह, नीरज कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग आयुक्त हंसादत्त पांडेय ने किसानों के लिए सभी प्रकार के उर्वरकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया जनपद की सभी गन्ना समितियों में किसानों के प्रयोग के लिए उपलब्ध करा दिया है। नैनो यूरिया के प्रयोग से गन्ना का उत्पादन कम लागत में अधिक लिया जा सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र धनौरी के डॉ. पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि गन्ने की प्रजाति सीओ 0238 अधिक उत्पादन देने वाली प्रजाति है। इसमें कीट प्रबंधन का विशेष ध्यान रखना होता है। उन्होंने मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए जैविक उत्पादों जैसे गोबर की सड़ी खाद, कंपोस्ट, जैव उर्वरक, सागरिका आदि के प्रयोग करने की सलाह दी। इफ्को एमसी के प्रतिनिधि अंकुश चौधरी ने गन्ने में लगने वाले कीट एवं बीमारियों की रोकथाम के बारे में जानकारी दी। इफ्को के राज्य विपणन प्रबंधक राकेश कुमार श्रीवास्तव नए उत्पाद नैनो यूरिया के प्रयोग करने के तरीके एवं उसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया।
विज्ञापन
सहायक गन्ना आयुक्त शैलेंद्र सिंह ने कहा कि नैनो यूरिया पारंपरिक यूरिया से सस्ता है और इसके परिवहन में कुछ भी खर्च नहीं है। पारंपरिक दानेदार यूरिया की फसल की ओर से उपयोग क्षमता मात्र 30 से 40 प्रतिशत है। जबकि नैनो यूरिया की उपयोग क्षमता 80 से 90 प्रतिशत है। भविष्य में नैनो तकनीक पर आधारित अन्य आवश्यक उर्वरकों की आपूर्ति होनी चाहिए। इस मौके पर इफको के मुख्य क्षेत्रीय प्रबंधक हरिद्वार डॉ. राम भजन सिंह, सहायक गन्ना आयुक्त देहरादून हिमानी पाठक, सुशील राठी, पवन ढींगरा, ओमवीर सिंह, नीरज कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन