भगवान सूर्य की उपासना के छठ पर्व के तीसरे दिन गंगा के अनेक तटों पर छठ व्रती महिलाएं अपने सूप और डाले लेकर उमड़ पड़ी। गंगा तटों पर ढोल और बैंड बाजों के साथ छठ शोभायात्रा निकाली गई। गंगा में कमर तक पानी में खड़े होकर हजारों महिलाओं ने दक्षिण दिशा की ओर मुख कर अस्त होते सूर्य को दूध मिश्रित गंगा जल चढ़ाया।
जोरदार आतिशबाजी और हरकी पैड़ी सहित तमाम घाटों पर गाए जा रहे छठी मैया के गीतों के बीच सायंकाल चार बजे पूजा शुरू हो गई थी। ऐसा लग रहा था मानो धर्मनगरी की सभी सड़कें गंगा के घाटों की ओर मुड़ गई हो। हरकी पैड़ी के मालवीय द्वीप का अत्यंत भव्य नजारा था। इसी तरह अग्रसेन घाट, परमार्थ घाट, सर्वानंद घाट, भूमा घाट, रोडी बेलवाला मैदान, प्रेम नगर घाट, विश्वकर्मा घाट, सिंहद्वार घाट व ज्वालापुर के दुर्गा और सीता घाटों पर अपार भीड़ उमड़ पड़ी थी। हरिद्वार में इन दिनों यात्रा पर आए गुजरातियों और बंगालियों ने भी छठ पूजा का आनंद लिया। व्रतधारी महिलाओं के साथ पुुरुष उनके डाले और अन्य सामान लेकर चल रहे थे। नाक से मस्तक पर सुहाग चिह्न तक मोटा तिलक लगाए महिलाएं अनेक रंग बिरंगे परिधानों में रंगी हुई थी। जो घाट गंगा के उस पार बने हैं, उन पर सबसे अधिक भीड़ थी। चारों ओर छठ के पारंपरिक गीत गाए जा रहे थे। ध्वनि विस्तारक यंत्रों द्वारा गीतों का प्रसार किया जा रहा था। इस भव्य नजारे की शोभा देखते ही बनती थी। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, भगवान भास्कर लाल रंग के होकर अस्त होने लगे। इसी समय फल, मिठाई, मूली आदि रखे सूप हाथों में लेकर महिलाओं ने सूर्य देव की आरती उतारी। मंगल कामनाओं के स्वरूप अस्त होते सूर्य से महिलाओं ने अपने और परिवार के लिए मन्नतें भी मांगी। देर रात तक गंगा तटों तक पूर्वांचल वासियों की आतिशबाजी का आनंद लेती रही। ज्वालापुर के सीता घाट पर मंच सजाकर रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन भी कलाकारों ने किया। 36 घंटे लंबे इस व्रत का समापन रविवार को सवेरे उदयांचल सूर्य को अर्घ्य देकर किया जाएगा। पूर्वांचल जनजागृति संस्था के अध्यक्ष बीएस चौबे, कमलेश्वर मिश्रा, एसपी शुक्ल, चंद्रकांत पांडेय आदि अनेक पदाधिकारियों ने घाटों पर जाकर अर्घ्य के प्रबंध किए।

छठ पर्व पर हरकी पैड़ी पर पूजा करने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।- फोटो : HARIDWAR