{"_id":"6102f8c78ebc3e586672a887","slug":"the-decision-to-open-the-school-raised-the-concern-of-experts-haridwar-news-drn385964437","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूल खोलने के फैसले ने बढ़ाई विशेषज्ञों की चिंता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूल खोलने के फैसले ने बढ़ाई विशेषज्ञों की चिंता
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका के बीच ऑफलाइन शिक्षण कार्य के लिए स्कूलों ने तो तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही लोगों को तीसरी लहर और बच्चों की चिंता सताने लगी है। शिक्षाविद्, अभिभावकों और बाल रोग विशेषज्ञ फिलहाल बच्चों के जीवन को देखते हुए स्कूल खोलने के मौजूदा समय को उपयुक्त नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि पहले बच्चों को जीवन बचाया जाए। संक्रमण की तीसरी लहर को देखने और स्थिति सामान्य होने के बाद ही स्कूलों को खोला जाए।
--------------
- विद्यालय में 80 बच्चे पंजीकृत हैं। दो दिन विद्यालय को सैनिटाइज किया जाएगा। बच्चों को मास्क और सैनिटाइज करने के बाद प्रवेश दिया जाएगा। हैंडवॉश के लिए सैनिटाइजर और साबुन रखे जाएंगे। शारीरिक दूरी का पालन करते हुए शिक्षण कार्य चलाया जाएगा। मिड-डे मील भी बच्चों को स्कूल में ही दिया जाएगा।
- रागिनी गुप्ता, प्रधानाध्यापिका, उच्च प्राथमिक विद्यालय टिबड़ी
----------
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की चेतावनी विशेषज्ञ और सरकार निरंतर दे रही है। इसको देखते हुए फिलहाल स्कूल खोलने का उपयुक्त समय नहीं है। जनपद कोरोना संक्रमण के मामलों में जीरो होने पर ही स्कूल खोले जाएं। जिससे बच्चों में संक्रमण के फैलने का खतरा कम हो सके, क्योंकि एक केस से भी बड़े स्तर पर संक्रमण फैल सकता है।
विज्ञापन
- डॉ. संदीप निगम, बाल रोग विशेषज्ञ
------------
महाविद्यालय में भी सितंबर से प्रवेश और अक्तूबर से शिक्षण कार्य शुरू कराने के आदेश हैं। सरकार को संक्रमण की तीसरी लहर की चेतावनी को देखते हुए थोड़ा और इंतजार करना चाहिए, क्योंकि बच्चों को न तो अभी टीके लगे हैं और न ही स्कूलों में कोई स्वास्थ्य सुविधा है। सरकार को स्कूल खोलने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
- डॉ. सुनील कुमार बत्रा, शिक्षाविद्
------------------
डेढ़ साल से शिक्षण कार्य न होने से बच्चे उदास और परेशान हैं। बिना किसी कारण के चिड़चिड़े हो रहे हैं। स्कूल खुलने से बच्चों की पढ़ाई तो होगी ही, एक दिनचर्या बनने से उनकी मानसिक परेशानी और उनके मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। परीक्षाओं की तैयारी करने का भी अवसर मिलेगा। गाइडलाइन के साथ स्कूलों को खोला जाना बच्चों के हित में है।
- ऋचा आर्य, साइक्लोजिस्ट डीपीएस
-----------
अब कोरोना संक्रमण के केस कम होने लगे हैं। इसलिए यह समय स्कूल खोलने के लिए उपयुक्त है। ऐसे में स्कूल खुलने से बच्चों की फिर से पढ़ाई शुरू हो सकेगी। बच्चों को गाइडलाइन का पालन करते हुए स्कूलों में पढ़ाया जाए।
- सुलेखचंद, पूर्व प्रधानाध्यापक
---------
अभिभावक भी तैयार नहीं
अभिभावक राजीव त्यागी, सुशील कश्यप, नीतू सिंह का कहना है कि स्कूल नहीं खुलने से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है, लेकिन कोरोना से बच्चों की जान को भी खतरा है। इसलिए फिलहाल सरकार इंतजार करे। तीसर लहर आती है तो उसके बाद ही स्कूल खोलने का निर्णय लेना चाहिए।
-------------
स्कूल खोलने के निर्णय पर फिर विचार करे सरकार
हरिद्वार। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने राज्य सरकार के दो अगस्त से स्कूल खोले जाने के फैसले पर चिंता व्यक्त की है। प्रेस को जारी बयान में कहा है कि विशेषज्ञों ने कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आने की आशंका व्यक्त की है। तीसरी लहर से बच्चों के अधिक प्रभावित होना बताया जा रहा है। इसको देखते हुए फिलहाल सरकार को अपना फैसला टालकर बच्चों के जीवन को खतरे में डालने से बचाए।
विज्ञापन
--------------
- विद्यालय में 80 बच्चे पंजीकृत हैं। दो दिन विद्यालय को सैनिटाइज किया जाएगा। बच्चों को मास्क और सैनिटाइज करने के बाद प्रवेश दिया जाएगा। हैंडवॉश के लिए सैनिटाइजर और साबुन रखे जाएंगे। शारीरिक दूरी का पालन करते हुए शिक्षण कार्य चलाया जाएगा। मिड-डे मील भी बच्चों को स्कूल में ही दिया जाएगा।
विज्ञापन
- रागिनी गुप्ता, प्रधानाध्यापिका, उच्च प्राथमिक विद्यालय टिबड़ी
----------
कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की चेतावनी विशेषज्ञ और सरकार निरंतर दे रही है। इसको देखते हुए फिलहाल स्कूल खोलने का उपयुक्त समय नहीं है। जनपद कोरोना संक्रमण के मामलों में जीरो होने पर ही स्कूल खोले जाएं। जिससे बच्चों में संक्रमण के फैलने का खतरा कम हो सके, क्योंकि एक केस से भी बड़े स्तर पर संक्रमण फैल सकता है।
विज्ञापन
- डॉ. संदीप निगम, बाल रोग विशेषज्ञ
------------
महाविद्यालय में भी सितंबर से प्रवेश और अक्तूबर से शिक्षण कार्य शुरू कराने के आदेश हैं। सरकार को संक्रमण की तीसरी लहर की चेतावनी को देखते हुए थोड़ा और इंतजार करना चाहिए, क्योंकि बच्चों को न तो अभी टीके लगे हैं और न ही स्कूलों में कोई स्वास्थ्य सुविधा है। सरकार को स्कूल खोलने के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
- डॉ. सुनील कुमार बत्रा, शिक्षाविद्
------------------
डेढ़ साल से शिक्षण कार्य न होने से बच्चे उदास और परेशान हैं। बिना किसी कारण के चिड़चिड़े हो रहे हैं। स्कूल खुलने से बच्चों की पढ़ाई तो होगी ही, एक दिनचर्या बनने से उनकी मानसिक परेशानी और उनके मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। परीक्षाओं की तैयारी करने का भी अवसर मिलेगा। गाइडलाइन के साथ स्कूलों को खोला जाना बच्चों के हित में है।
- ऋचा आर्य, साइक्लोजिस्ट डीपीएस
-----------
अब कोरोना संक्रमण के केस कम होने लगे हैं। इसलिए यह समय स्कूल खोलने के लिए उपयुक्त है। ऐसे में स्कूल खुलने से बच्चों की फिर से पढ़ाई शुरू हो सकेगी। बच्चों को गाइडलाइन का पालन करते हुए स्कूलों में पढ़ाया जाए।
- सुलेखचंद, पूर्व प्रधानाध्यापक
---------
अभिभावक भी तैयार नहीं
अभिभावक राजीव त्यागी, सुशील कश्यप, नीतू सिंह का कहना है कि स्कूल नहीं खुलने से बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है, लेकिन कोरोना से बच्चों की जान को भी खतरा है। इसलिए फिलहाल सरकार इंतजार करे। तीसर लहर आती है तो उसके बाद ही स्कूल खोलने का निर्णय लेना चाहिए।
-------------
स्कूल खोलने के निर्णय पर फिर विचार करे सरकार
हरिद्वार। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने राज्य सरकार के दो अगस्त से स्कूल खोले जाने के फैसले पर चिंता व्यक्त की है। प्रेस को जारी बयान में कहा है कि विशेषज्ञों ने कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आने की आशंका व्यक्त की है। तीसरी लहर से बच्चों के अधिक प्रभावित होना बताया जा रहा है। इसको देखते हुए फिलहाल सरकार को अपना फैसला टालकर बच्चों के जीवन को खतरे में डालने से बचाए।