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रक्षा के क्षेत्र में देश निरंतर हो रहा मजबूत: सिंह
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गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में भारत सरकार के साप्ताहिक विज्ञान महोत्सव विज्ञान सर्वत्र पूज्यते के सातवें दिन मुख्य वक्ता डीआरडीओ (डील) देहरादून के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह ने देश की रक्षा तकनीकों पर पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से व्याख्यान दिया। डॉ. सिंह ने कहा कि आज रक्षा के क्षेत्र में हम निरंतर मजबूत हो रहे हैं। इस दौरान अर्जुन टैंक, टी-72 टैंक, ब्रिजलेइंग टैंक और अन्य शास्त्रों के दृश्यों को दिखाया गया।
डॉ. सिंह ने डीआरडीओ की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं और पाठ्यक्रमों के विषय में भी चर्चा की। विद्यार्थियों से अपील की कि वे रक्षा तंत्र की तकनीकों में अपनी रुचि विकसित करें। अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट ने कहा कि विज्ञान के आविष्कार जब मानव हित और विकास पर केंद्रित होता है तो उनका स्वरूप पूजनीय हो जाता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के आविष्कार अपनी मूल प्रवृत्ति में उदासीन होते हैं। अब यह मानव प्रवृत्ति पर निर्भर करता है कि वह उनका प्रयोग विकास व उत्थान के लिए करता है या विनाश के लिए। पत्रकार अनुपम त्रिवेदी ने विज्ञान के प्रसार में पत्रकारिता के योगदान विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि विज्ञान कोई डरावना विषय नहीं है और आज यह आवश्यक हो गया है कि हम विज्ञान की बारीकियों को समझने का प्रयास करें। कार्यक्रम में शैल रचना सोसायटी की अध्यक्ष कृति रावत ने कहा कि हमारी क्षेत्रीय कला और संस्कृति का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाना नितांत आवश्यक है। इसके लिए आमजन को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। इस मौके पर ओहो रेडियो के सुप्रसिद्ध वक्ता आरजे काव्य, प्रो. एलपी पुरोहित, प्रो. सचिन माहेश्वरी, डॉ. अश्विनी रानाडे, डॉ. हेमवती नंदन, डॉ. विनय सेठी, डॉ. हिमांशु पंडित आदि मौजूद रहे।
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डॉ. सिंह ने डीआरडीओ की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं और पाठ्यक्रमों के विषय में भी चर्चा की। विद्यार्थियों से अपील की कि वे रक्षा तंत्र की तकनीकों में अपनी रुचि विकसित करें। अंतरराष्ट्रीय पक्षी वैज्ञानिक प्रो. दिनेश भट्ट ने कहा कि विज्ञान के आविष्कार जब मानव हित और विकास पर केंद्रित होता है तो उनका स्वरूप पूजनीय हो जाता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के आविष्कार अपनी मूल प्रवृत्ति में उदासीन होते हैं। अब यह मानव प्रवृत्ति पर निर्भर करता है कि वह उनका प्रयोग विकास व उत्थान के लिए करता है या विनाश के लिए। पत्रकार अनुपम त्रिवेदी ने विज्ञान के प्रसार में पत्रकारिता के योगदान विषय पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि विज्ञान कोई डरावना विषय नहीं है और आज यह आवश्यक हो गया है कि हम विज्ञान की बारीकियों को समझने का प्रयास करें। कार्यक्रम में शैल रचना सोसायटी की अध्यक्ष कृति रावत ने कहा कि हमारी क्षेत्रीय कला और संस्कृति का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाना नितांत आवश्यक है। इसके लिए आमजन को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। इस मौके पर ओहो रेडियो के सुप्रसिद्ध वक्ता आरजे काव्य, प्रो. एलपी पुरोहित, प्रो. सचिन माहेश्वरी, डॉ. अश्विनी रानाडे, डॉ. हेमवती नंदन, डॉ. विनय सेठी, डॉ. हिमांशु पंडित आदि मौजूद रहे।
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