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स्वामी शिवानंद ने मांगी इच्छा मृत्यु
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:12 PM IST
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रायवाला से भोगपुर तक गंगा में खनन पर लगी रोक को हटाने के विरोध में मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने इच्छा मृत्यु मांगी है। स्वामी शिवानंद ने राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस उत्तराखंड और राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर सात दिन का समय दिया है। पत्र में उन्होंने कहा कि इसके बाद वह आमरण अनशन (तपस्या) शुरू कर देंगे। स्वामी शिवानंद के इस फैसले से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मातृसदन पहुंचे एसडीएम और सीओ को स्वामी शिवानंद ने खनन बंद होने तक वार्ता न करने की बात कहकर लौटा दिया।
गंगा में खनन बंद करने की मांग को लेकर मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद पिछले 13 दिन से अनशन पर हैं। इसी बीच प्रदेश सरकार ने रायवाला से भोगपुर के बीच खनन से रोक हटा दी है। इस पर मातृसदन ने कड़ी आपत्ति जताई है। स्वामी शिवानंद ने बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता कर बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, उत्तराखंड के चीफ जस्टिस और राज्यपाल को चिट्ठी भेजी है। जिसमें उनसे पूछा गया है कि राज्य में संविधान का शासन है या किसी व्यक्ति की मनमानी चलेगी। यदि संविधान का शासन है तो सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, एनजीटी और वैज्ञानिक दल की रिपोर्ट में रोक लगाने के बावजूद गंगा में खनन किस आधार पर कराया जा रहा है। खनन पर रोक लगाने के लिए अनशन चल रहा है, उस पर ध्यान देने के बजाय पहले से लगी रोक हटाई जा रही है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि राज्य में यदि संविधान का शासन नहीं है तो उन्हें भी मत रोका जाए। एक साधु को अपनी तपस्या का अधिकार है। यदि सात दिन में जवाब नहीं मिलता है तो सबकी मूक सहमति मान ली जाएगी और वह उच्च से उच्चतर तपस्या शुरू करेंगे। आत्मा की लय में विलीन होने तक तपस्या जारी रहेगी। स्वामी शिवानंद ने बताया कि चिट्ठी की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित काबीना मंत्रियों और सभी विधायकों को भेजी गई है। वहीं एलआईयू के माध्यम से स्वामी शिवानंद के इस फैसले की जानकारी प्रशासन के आला अधिकारियों तक पहुंची तो दोपहर बाद एसडीएम मनीष कुमार, सीओ कनखल मनीषा जोशी, कनखल थानाध्यक्ष जवाहरलाल मातृसदन पहुंचे। मगर स्वामी शिवानंद ने खनन बंद होने से पहले किसी भी वार्ता से इनकार कर दिया।
रात दो बजे लिया गया निर्णय
स्वामी शिवानंद ने बताया कि रात दो बजे वह ध्यान में थे। तभी उन्हें कुछ संकेत मिले और इच्छा मृत्यु का निर्णय लिया गया। इसकी जानकारी तत्काल उन्होंने आश्रम के ब्रह्मचारी दयानंद आदि को दी।
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डीएम और स्वास्थ्य मंत्री पर बरसे शिवानंद
स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने खनन खोलने को लेकर सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में यह तर्क दिया है कि उन्होंने डीएम की मार्फत चार बार मातृसदन का पक्ष जानने का प्रयास किया, मगर उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा। इस पर स्वामी शिवानंद ने अपना लिखित पक्ष भेजने के प्रमाण दिखाते हुए कहा कि जिलाधिकारी को तत्काल सस्पेंड किया जाना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। साथ ही मुख्यमंत्री हरीश रावत पर तो खनन को खुला संरक्षण देने और हरिद्वार को तबाही के गर्त में धकेलने का आरोप लगाया।
गंगा में खनन बंद करने की मांग को लेकर मातृसदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद पिछले 13 दिन से अनशन पर हैं। इसी बीच प्रदेश सरकार ने रायवाला से भोगपुर के बीच खनन से रोक हटा दी है। इस पर मातृसदन ने कड़ी आपत्ति जताई है। स्वामी शिवानंद ने बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता कर बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, उत्तराखंड के चीफ जस्टिस और राज्यपाल को चिट्ठी भेजी है। जिसमें उनसे पूछा गया है कि राज्य में संविधान का शासन है या किसी व्यक्ति की मनमानी चलेगी। यदि संविधान का शासन है तो सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, एनजीटी और वैज्ञानिक दल की रिपोर्ट में रोक लगाने के बावजूद गंगा में खनन किस आधार पर कराया जा रहा है। खनन पर रोक लगाने के लिए अनशन चल रहा है, उस पर ध्यान देने के बजाय पहले से लगी रोक हटाई जा रही है। स्वामी शिवानंद ने कहा कि राज्य में यदि संविधान का शासन नहीं है तो उन्हें भी मत रोका जाए। एक साधु को अपनी तपस्या का अधिकार है। यदि सात दिन में जवाब नहीं मिलता है तो सबकी मूक सहमति मान ली जाएगी और वह उच्च से उच्चतर तपस्या शुरू करेंगे। आत्मा की लय में विलीन होने तक तपस्या जारी रहेगी। स्वामी शिवानंद ने बताया कि चिट्ठी की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित काबीना मंत्रियों और सभी विधायकों को भेजी गई है। वहीं एलआईयू के माध्यम से स्वामी शिवानंद के इस फैसले की जानकारी प्रशासन के आला अधिकारियों तक पहुंची तो दोपहर बाद एसडीएम मनीष कुमार, सीओ कनखल मनीषा जोशी, कनखल थानाध्यक्ष जवाहरलाल मातृसदन पहुंचे। मगर स्वामी शिवानंद ने खनन बंद होने से पहले किसी भी वार्ता से इनकार कर दिया।
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रात दो बजे लिया गया निर्णय
स्वामी शिवानंद ने बताया कि रात दो बजे वह ध्यान में थे। तभी उन्हें कुछ संकेत मिले और इच्छा मृत्यु का निर्णय लिया गया। इसकी जानकारी तत्काल उन्होंने आश्रम के ब्रह्मचारी दयानंद आदि को दी।
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डीएम और स्वास्थ्य मंत्री पर बरसे शिवानंद
स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने खनन खोलने को लेकर सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में यह तर्क दिया है कि उन्होंने डीएम की मार्फत चार बार मातृसदन का पक्ष जानने का प्रयास किया, मगर उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा। इस पर स्वामी शिवानंद ने अपना लिखित पक्ष भेजने के प्रमाण दिखाते हुए कहा कि जिलाधिकारी को तत्काल सस्पेंड किया जाना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। साथ ही मुख्यमंत्री हरीश रावत पर तो खनन को खुला संरक्षण देने और हरिद्वार को तबाही के गर्त में धकेलने का आरोप लगाया।