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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Haridwar News ›   Such as the condition of the Ganga Kaveri began

कावेरी जैसे होने लगी गंगा की हालत

Mon, 02 May 2016 12:23 AM IST
hridwar uttrakhanda india
hridwar uttrakhanda india Updated Mon, 02 May 2016 12:23 AM IST
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हरिद्वार। गंगा में घटता जलस्तर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्य के बीच दक्षिण के दो राज्यों तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों से चला आ रहा कावेरी नदी जल विवाद जैसा रूप ले सकता है। गंगा का जलस्तर घटकर करीब 4 हजार क्यूसेक हो गया।

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हरकी पैड़ी ब्रह्मकुुंड के लिए भागीरथी बिंदु से निकली गंगाजी की प्राकृतिक एवं अविछिन्न धारा में पानी की कमी तो पहले भी होती रही है, लेकिन अविछिन्न धारा पूरी तरह से जलविहीन होती पहली बार लोग देख रहे हैं। तीन दिन से यह स्थिति बनी हुई है। गंगा में पानी कम होने से उत्तरी खंड गंगनहर में भी पानी सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। जो पानी उपलब्ध है उसको उत्तर प्रदेश पहुंचाने की वजह से जिले की नहरों व गूलों को पानी नहीं दिया जा रहा है। गन्ना किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। स्थिति में सुधार नहीं होता है तो उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के बीच जल की हिस्सेदारी का सवाल उठना लाजिमी हो जाएगा। डर इस बात का है कि कहीं गंगा नदी के जल में हिस्सेदारी का विवाद दक्षिण की कावेरी नदी का जल बंटवारा जैसा न सुलझने वाला रूप न ले ले।     
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बांध से नियंत्रित पानी देने के विरुद्घ हुआ था संघर्ष
सन 1914 में तत्कालीन ब्रिटिश हुक्मरानों के नहर विभाग ने गंगा जी पर बांध बनाकर हरकी पैड़ी के लिए कृत्रिम व नियंत्रित धारा प्रवाहित करने की योजना बनाई थी। जिसके विरुद्घ महामना पं मदनमोहन मालवीय के नेतृत्व में बड़ा आंदोलन हुआ। इसके बाद 1916 में ब्रिटिश हुक्मरानों को हरकी पैड़ी के लिए गंगा जी प्राकृतिक एवं अविछिन्न धारा प्रवाहित करने व पर्याप्त जलापूर्ति बनाए रखने का समझौता करना पड़ा था। लेकिन इस समझौते का उत्तर प्रदेश का कैनाल विभाग बार-बार उल्लंघन करता रहा है और अब तक धारा जलविहीन हो गई है।
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जिले में 28 नहरें हैं
गंगा नदी में पानी की कमी और गंगनहर संचालन की कमांड यूपी के हाथ में है। जिले ही नहरों में पानी छोड़ना न छोड़ना भी उनके हाथ में है। जाहिर है कि पानी की भारी कमी होने के कारण उत्तर प्रदेश को अधिक से अधिक पानी पहुंचाने की जरूरत को ध्यान में रखकर जिले की नहरों में पानी बहुत कम छोड़ा जा रहा है। जिससे सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है।

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उत्तराखंड सिंचाई विभाग को बताया जिम्मेदार
हरकी पैड़ी को आने वाली गंगा जी की प्राकृतिक अविछिन्न धारा के जलविहीन होने के लिए उतरी खंड गंगनहर हैडवर्क्स के सहायक अभियंता सुशील यादव ने उत्तराखंड सिंचाई विभाग को भी जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि गंगा नदी में यूं तो पीछे से ही पानी की भारी कमी है, जिसका असर अविछिन्न धारा के प्रवाह पर भी पड़ा हैं। अर्द्घकुंभ के दौरान सिंचाई विभाग ने अविछिन्न धारा में जो रिग्रेडिंग का अंधाधुुंध काम किया, उससे लेबलिंग गड़बड़ा गया है। तब हमने मना भी किया था, परंतु किसी ने हमारी सुनी नहीं। जिसका दुष्परिणाम सामने दिखाई देने लगा है। उन्होंने बताया कि चीला पावर हाउस में अधिक पानी देने से स्थिति अधिक खराब हुई है। 

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