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चिड़ियापुर में बनेगी राज्य की पहली लैपर्ड बेबी केयर नर्सरी

Mon, 11 Apr 2022 10:27 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 10:27 PM IST
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State's first Leopard Baby Care Nursery to be built in Chidiyapur
वन विभाग की ओर से रेस्क्यू किया गया गुलदार का शावक । फाइल फोटो - फोटो : HARIDWAR
अब मां से बिछड़े लैपर्ड (गुलदार) के नन्हें शावकों का जीवन भी बचाया जा सकेगा। इसके लिए चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में लैपर्ड बेबी केयर नर्सरी बनाई जा रही है। गुलदार के शावकों के लिए इस तरह की उत्तराखंड की यह पहली नर्सरी होगी।
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वन विभाग की ओर से चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर बनाया गया है। यहां रेस्क्यू किए गए गुलदार समेत अनेक वन्य जीवों को रखा जाता है। उन्हें उपचार देने के बाद या तो जंगल में छोड़ दिया जाता है या जरूरत पड़ने पर उन्हें रेस्क्यू सेंटर में ही रखा जाता है। प्रदेश में कहीं भी लैपर्ड के नन्हें शावकों को रखने के लिए नर्सरी नहीं है। इसके कारण जन्म के कुछ ही दिन बाद मां से बिछड़े बच्चों की देखभाल नहीं हो पाती है। इस वजह से उनकी मौत हो जाती है। इसको देखते हुए चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में लैपर्ड बेबी केयर नर्सरी बनाई जा रही है। नर्सरी में जन्म से लेकर पांच महीने तक के बच्चों को रखा जा सकेगा। इसमें बच्चों के लिए विशेष प्रकार के दूध और आहार की व्यवस्था की जाएगी। पांच लाख रुपये के बजट से नर्सरी तैयार करने के लिए कार्य शुरू कर दिया गया है।
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रेस्क्यू किए दो बच्चों की हुई थी मौत
पिछले साल मार्च में हरिद्वार रेंज क्षेत्र में गुलदार के दो शावक रेस्क्यू किए गए थे। इसमें से एक शावक पथरी क्षेत्र के गन्ने के खेत में मिला था। इसकी उम्र एक माह से भी कम थी। इसके अलावा सिडकुल की एक कंपनी के पास भी गुलदार के एक बच्चे को पकड़ा गया था। इसकी उम्र भी बहुत कम थी। रेस्क्यू किए गए गुलदार के इन नन्हें शावकों को रेस्क्यू सेंटर चिड़ियापुर भेजा गया था लेकिन उनकी देखभाल के लिए नर्सरी नहीं होने से उनकी मौत हो गई थी।
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बच्चों के लिए बनेंगे अलग-अलग कंपार्टमेंट
लैपर्ड के बच्चों को रखने के लिए गुलदार के बाड़ों की तर्ज पर नर्सरी में भी अलग-अलग कंपार्टमेंट बनाए जाएंगे। ये कंपार्टमेंट लकड़ी से बनाए जाएंगे ताकि नन्हें शावकों को अलग-अलग रखकर उनकी जरूरत का आहार दिया जा सके।
गेट पर लगेगा एयर फिल्टर
नर्सरी में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए खासतौर पर नर्सरी के गेट पर ही एयर फिल्टर लगाया जाएगा। एयर फिल्टर से गुजने के बाद बैक्टीरिया लैपर्ड के बच्चों तक नहीं पहुंचेंगे। इससे उन्हें मनुष्य में होने वाले संक्रमण और बीमारियों से बचाया जा सकेगा।
पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलेगी नर्सरी
चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में बनने जा रही नर्सरी को पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जाएगा। नर्सरी के अच्छे परिणाम आने के बाद इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए और विस्तार किया जाएगा ताकि उसमें अधिक संख्या में लैपर्ड के बच्चों को रखकर उन्हें बचाया जा सके।
गुलदार के बच्चों का जीवन बचाने के लिए तैयार की जा रही यह नर्सरी उत्तराखंड की पहली नर्सरी होगी। इससे पहले उत्तराखंड में कहीं भी ऐसी नर्सरी नहीं बनी है जिससे आने वाले समय में रेस्क्यू किए जाने वाले लैपर्ड के बच्चों को बचाने में मदद मिल सकेगी। - डॉ. अमित ध्यानी, वरिष्ठ पशु चिकित्सक, वन विभाग, हरिद्वार

कम उम्र के बच्चे मां से बिछड़ने पर नहीं रह पाते हैं। उनके लिए विशेष प्रकार की नर्सरी बनाने से भविष्य में रेस्क्यू किए गए बहुत कम उम्र के बच्चों को भी अन्य गुलदारों की तरह बचाया जा सकेगा। - दीपक सिंह, डीएफओ, हरिद्वार
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