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हरिद्वार में नववर्ष मनाने पहुंचे कुछ श्रद्धालु
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
Updated Fri, 30 Dec 2016 10:46 PM IST
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सर्दियों में यात्रियों को लुभाने की उत्तराखंड पर्यटन विभाग की ओर से की गई कोशिशें हरिद्वार में कामयाब नहीं हो पाई हैं। तथापि नया साल मनाने के लिए कुछ श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचे हैं। यह श्रद्धालु दो दिन तक गंगा तट पर रुककर समीपवर्ती क्षेत्रों का भ्रमण भी करेंगे और परिवार की समृद्धि के लिए छोटे अनुष्ठान भी कराएंगे।
पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश सरकार सर्दियों के ऑफ सीजन में यात्रियों को उत्तराखंड लाने के लिए प्रयत्न कर रही है। इसके लिए देवों के शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए बसों का प्रबंध भी किया जाता है। बावजूद इसके पिछले तीन वर्षों से शारदीय यात्रा पर जाने वालों की संख्या लगभग शून्य है। पुराने यात्रा व्यवसायी सुरेश ठाकुर और गोपाल कृष्ण के अनुसार धार्मिक पर्यटन हरिद्वार में तो निरर्थक साबित हो गया है। अलबत्ता नया साल मनाने के लिए कुछ तीर्थयात्री दो दिन गंगा तट पर बीताने के लिए जरूर पहुंचते है। बड़ा बाजार निवासी पं. मोहन लाल के अनुसार कुछ संख्या में यात्री दो दिनों के लिए धार्मिक पूजा अनुष्ठान करने पहुंचे हैं। यह यात्री नया साल गंगा तट पर मनाना चाहते हैं। पं. शिवकुमार शास्त्री बताते हैं कि दो यात्रियों को परिवार समृद्धि पूजा वे खुद कराएंगे। इस पूजा में लक्ष्मी नारायण की अर्चना की जाती है। मां गंगा से प्रार्थना की जाती है कि परिवार में समृद्धि आएं।
उधर, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा के अनुसार इस बार नववर्ष पर आने वालों की संख्या काफी कम है। इसका कारण नोटबंदी को भी माना जा रहा है। पहले टाइगर रिजर्व, ऋषिकेश तथा मसूरी जाने के लिए धार्मिक यात्री अधिक संख्या में नववर्ष पर आते थे। ये यात्री एक दिन हरिद्वार में रुककर गंगा पूजन और आरती में भाग लेते थे। यात्रियों की बुकिंग काफी पहले हो जाती थी। नोटबंदी के चलते पर्यटकों का बजट गड़बड़ा गया है और बहुत कम संख्या में यात्री नववर्ष मनाने गंगा तट आए। जो यात्री पहुंचे है उनका आर्कषण गंगा आरती के साथ टाइगर रिजर्व भी है।
पिछले कुछ वर्षों से प्रदेश सरकार सर्दियों के ऑफ सीजन में यात्रियों को उत्तराखंड लाने के लिए प्रयत्न कर रही है। इसके लिए देवों के शीतकालीन गद्दीस्थल के लिए बसों का प्रबंध भी किया जाता है। बावजूद इसके पिछले तीन वर्षों से शारदीय यात्रा पर जाने वालों की संख्या लगभग शून्य है। पुराने यात्रा व्यवसायी सुरेश ठाकुर और गोपाल कृष्ण के अनुसार धार्मिक पर्यटन हरिद्वार में तो निरर्थक साबित हो गया है। अलबत्ता नया साल मनाने के लिए कुछ तीर्थयात्री दो दिन गंगा तट पर बीताने के लिए जरूर पहुंचते है। बड़ा बाजार निवासी पं. मोहन लाल के अनुसार कुछ संख्या में यात्री दो दिनों के लिए धार्मिक पूजा अनुष्ठान करने पहुंचे हैं। यह यात्री नया साल गंगा तट पर मनाना चाहते हैं। पं. शिवकुमार शास्त्री बताते हैं कि दो यात्रियों को परिवार समृद्धि पूजा वे खुद कराएंगे। इस पूजा में लक्ष्मी नारायण की अर्चना की जाती है। मां गंगा से प्रार्थना की जाती है कि परिवार में समृद्धि आएं।
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उधर, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा के अनुसार इस बार नववर्ष पर आने वालों की संख्या काफी कम है। इसका कारण नोटबंदी को भी माना जा रहा है। पहले टाइगर रिजर्व, ऋषिकेश तथा मसूरी जाने के लिए धार्मिक यात्री अधिक संख्या में नववर्ष पर आते थे। ये यात्री एक दिन हरिद्वार में रुककर गंगा पूजन और आरती में भाग लेते थे। यात्रियों की बुकिंग काफी पहले हो जाती थी। नोटबंदी के चलते पर्यटकों का बजट गड़बड़ा गया है और बहुत कम संख्या में यात्री नववर्ष मनाने गंगा तट आए। जो यात्री पहुंचे है उनका आर्कषण गंगा आरती के साथ टाइगर रिजर्व भी है।
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